अध्ययन द्वारा पता चला है कि ओमेगा -3

अध्ययन द्वारा पता चला है कि ओमेगा -3 एस आपके दिल को मज़बूत करता है, प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को बढ़ाता नहीं है

अगर आप भी विटामिन सप्लीमेंट लेते हैं तो ज़ाहिर सी बात है कि आपको ओमेगा 3 के बारे में अवश्य पता होगा।

ओमेगा 3 कुछ ऐसे फैटी एसिड यानी वसीय अम्ल हैं जो हमारे शरीर और दिमाग हो अद्भुत तरीकों से लाभ पहुंचाता है। यह तनाव और अवसाद दूर करने से लेकर हृदय रोगों से लड़ने तक हमारी सहायता करता है।

परंतु पिछले कुछ समय से कई अध्ययनों से यह सामने आ रहा है कि ओमेगा 3 का प्रॉस्टेट कैंसर से कुछ संबंध है। इसलिए कुछ समय से यह विवाद का मुद्दा बन गया है।

कई शोधकर्ताओं का कहना है कि ओमेगा 3 सप्लीमेंट लेना हमारे लिए लाभदायक की जगह खतरनाक हो सकता है।

फिलाडेल्फिया में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के वैज्ञानिक सत्र ने  हालही में नवंबर 17 को एक नया अनुसंधान पेश किया था।

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अनुसंधान में यह सामने आया था कि ओमेगा 3 हृदय रोगों की वजह से होने वाली मौतों को रोकने में सहायता करता है। शोधकर्ताओं द्वारा स्पष्ट रूप से यह भी कहा गया कि ओमेगा 3 प्रॉस्टेट कैंसर के जोखिम को किसी भी तरह नहीं बढ़ाता।

2013 में हुए एक अध्ययन में अधिक ओमेगा 3 के स्तर और प्रोस्टेट कैंसर के निर्माण के बीच संबंध होने की बात की गई थी। इसी विवाद को सुलझाने के लिए इस बार साल्ट लेक सिटी के इंटरमाउंटेन हस्पताल में इस अध्ययन को किया गया।

पुराने अध्यन में 834 प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित पुरुषों को शामिल किया गया था। इनकी तुलना उन पुरुषों से कि गई थी जिनके शरीर में ओमेगा – 3 का स्तर कम था।

शोध से यह मालूम हुआ था कि अधिक मात्रा में ओमेगा-3 लेने वाले पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना दोगुनी थी।

2017 के अध्ययन से भी इस बात की पुष्टि नहीं की जा रही थी की ओमेगा-3 और प्रोस्टेट कैंसर में कोई संबंध है या नहीं।

इंटर माउंटेन स्टडीज की शोधकर्ता और हृदयरोगविज्ञान अनुसंधान की सहायक चिकित्सक वियट ली का कहना है कि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा मरीजों को ओमेगा – 3 या मछली खाने को कहा जाता है।

ली ने बताया कि उनके अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य यह जानना था कि उन्हें मरीजों को यह लेने की सलाह देनी चाहिए या नहीं।

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ओमेगा 3 से संबंधित नए तथ्य

हालही में हुए अनुसंधान में शोधकर्ताओं की टीम ने इंटरमाउंटेन इंस्पायर रजिस्ट्री में दर्ज 87 प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित लोगों को इसका हिस्सा बनाया था।

इन मरीजों में दो महत्वपूर्ण वसीय अम्लों – डीएचए और ईपीए को जांचने की कोशिश की गई थी। इसके अतिरिक्त 149 अन्य पुरुषों को भी अनुसंधान में शामिल किया गया था।

जिससे यह सामने आया कि ओमेगा 3 के स्तर और प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम के बीच कोई भी संबंध नहीं है।

दूसरे अध्ययन में इंटर माउंटेन के शोधकर्ताओं ने उन 894 मरीजों को शामिल किया जो की कोरोनरी एंजियोग्राफी करवा रहे थे।

यह एक ऐसी प्रक्रिया है जहां दिल कि रक्त वाहिकाओं कि एक्सरे इमेजिंग की जाती है। इन मरीजों के चिकित्सक इतिहास में कोई भी हृदय रोग नहीं देखा गया था।

पहले एंजियोग्रम से यह सामने आया था कि तकरीबन 40 प्रतिशत व्यक्तियों में हृदय रोग तीव्र रूप से मौजूद था और 10 प्रतिशत लोगों में तीन वाहिका रोग देखा गया था। इन सभी मरीजों के रक्त में ओमेगा 3 के स्तर को भी मापा गया था, खासतौर पर डीएचए और ईपीए।

अध्ययन के परिणामों से यह सामने आया था कि अधिक मात्रा में मौजूद होने वाले मरीजों में हृदय रोग होने की सम्भावना अन्यों के मुकाबले कुछ काम थी।

डॉ मनीष ए. वीरा का मानना है जिस तरह देखा गया है कि भोजन में अधिक मछली खाने वाले लोगों में प्रोस्टेट कैंसर होने की सम्भावना कम पाई जाती है।

किस में पाया जाता है ?

  • मछली और फ्लैक्स सीड जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है और साथ ही फिश ऑयल में भी मौजूद होता है।
  • इनमें सबसे मुख्य हैं –  अल्फा लिनोलेनिक एसिड (एलए), इकोसापेंटेनॉयक एसिड (ईपीए) और डोकोसाहेक्सानोइक एसिड (डीएचए) ।
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