युवाओं में स्तन कैंसर की जागरुकता को बढ़ाना है आवश्यक

युवाओं में स्तन कैंसर की जागरुकता को बढ़ाना है आवश्यक

 

अक्टूबर के महीने को स्तन कैंसर जागरूकता माह माना जाता है। इस दौरान लोगों को स्तन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के बारे में जागरूक किया जाता है।

 

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी के मुताबिक 1990 से 2016 के बीच भारत में स्तन कैंसर का दर 39.1 प्रतिशत हो गया है। आंकड़ों के अनुसार 2016 में स्तन कैंसर के कुल 5.26 लाख मरीज़ देखे गए थे।

 

मर्दों में भी यह बीमारी पाई जा सकती है परन्तु अधिक संख्या में यह महिलाओं में ही पाई जाती है। स्तन कैंसर के कई कारण हो सकते हैं और उनमें से अधिकतर ऐसे हैं जिन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। परंतु हम आपको कुछ ऐसे कारकों के बारे में बताएंगे जो स्तन कैंसर जैसी बीमारी को पैदा कर सकते हैं।

इन कारकों को दूर करके हम खुद को इस जानलेवा बीमारी से बचा सकते हैं।

 

ज़्यादा खाना, कसरत ना करना और पौष्टिक भोजन ना लेना भी इसके कारक हो सकते हैं। परंतु मोटापे को इस बीमारी का सबसे भव्य और मुख्य कारण माना गया है।

 

वैश्विक पोषण रिपोर्ट 2018 के मुताबिक अधिकतर बालिग लोग मोटापे के शिकार हैं। आंकड़ों के अनुसार विश्व भर में 39 प्रतिशत बालिग लोग मोटापे से पीड़ित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मोटापे का अर्थ शरीर में अधिक चरबी का इकठ्ठा होना है जिससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

 

मोटापे से अधिक अंगों के कैंसर होने का जोखिम बढ़ जता है। इस सूची में थायरॉयड, पित्ताशय, पौरुष ग्रंथि, अंडाशय, अग्न्याशय, अन्नप्रनाली और स्तन कैंसर प्रमुख हैं। मोटापे से पीड़ित महिलाओं में स्तन कैंसर होने के आसार और भी बढ़ जाते हैं। माना जाता है कि अन्य स्वस्थ महिलाओं के मुकाबले अधिक वजन वाली महिलाओं में यह रोग होने के आसार 12 प्रतिशत बढ़ जाते हैं।

 

वजन पर नियंत्रण रखना स्वस्थ रहने के लिए बेहद आवश्यक माना जाता है परन्तु बढ़ती उम्र के साथ इस पर नियंत्रण रखना और भी कठिन हो जाता है। रजोनिविर्ती के दौरान अक्सर महिलाओं का वजन बढ़ जाता है और अपने साथ नई बीमारियों को आमंत्रण देता है। इसलिए इस बीमारी पर रोक लगाने के लिए बालिग उम्र से ही वजन पर ध्यान देना चाहिए। अधिकतर महिलाओं को इस रोग और इसके कारकों के बारे में जानकारी ही नहीं होती। लोगों को इस जानलेवा बीमारी से जागरूक करना बेहद आवश्यक हो गया है। 

 

जीवनशैली की कुछ खराब आदतों पर रोक लगाने से हम औरतों को इस रोग से बचा सकते हैं। शुरुवाती चिन्हों को पहचानने से औरतें इस बीमारी का सही समय पर इलाज पा सकती हैं। स्तन में गांठ, सूजन, स्तन से खून निकलना या उसकी बनावट में बदलाव आना आदि इसके कुछ शुरुवाती लक्षण हैं।  40 वर्ष से ऊपर महिलाओं को एक बार मैमोग्राफी ज़रूर करवानी चाहिए। 6 महीने तक बच्चों का स्तनपान करने से भी इस बीमारी को होने से रोका जा सकता है।

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