Tula Rashi

तुला राशि Tula Rashi परिचय और स्वाभाव

तुला राशि Tula Rashi: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते 

तुला राशि Tula Rashi में उत्पन्न जातक का स्वेत व सुंदर वर्ण, मध्यम अथवा लम्बा कद, सौम्य एवं हंसमुख प्रवृति होगी।

जातक/जातिका न्यायप्रिय, हंसमुख, व्यवहारशील एवं नीति के अनुसार कार्य करने में कुशल होगा। ईमानदार, मिलनसार, और नए-नए मित्र बनाने में कुशल होगा।

सौंदर्यनिभूति विशेष होगी। संगीत कला नाट्य की ओर अधिक झुकाव होगा। सहन का ढंग रईसी एवं प्रभावपूर्ण होगा।

तुला राशि के जातक पर संगीत का प्रभाव बहुत ही जल्दी होगा। चंद्र-शुक्र शुभ हो तो मानसिक एवं काल्पनिक शक्ति प्रबल होगी।

परन्तु मन की केंद्रीय शक्ति बहित अधिक देर तक नहीं रहती। जब तक किसी कार्य में लगा रहे, तब तक मजबूत और दिलोजान से करे, परन्तु अपने विचार और योजना में परिवर्तन करने के लिए शीघ्र तैयार हो जायेगा।

इसके जातक को देश-विदेश अनेक स्थानों पर घूमने के अवसर प्राप्त होंगे। बुद्धिमान, तर्कशील एवं सतर्क रहने वाला, मध्यस्थता एवं निर्णय करने में कुशल, विपरीत लिंग के प्रति झुकाव अधिक रखेगा।

तुला राशि के जातक न्याय को महत्व देते हैं। धार्मिक परम्पराओं और समाज के रीति-रिवाजोंका उलंघन नहीं करते।

इनका शरीर निर्माण बड़ा संतुलित होता है। तुला राशि वालों का दृश्टिकोण अति विशाल होता है।

भौतिक मामलों में तुला राशि के जातक प्रायः सफल रहते हैं। परिश्रम तथा सुनियोजन से संपत्ति अर्जित कर सकते है।

ये लोग चतुर व व्यापारी बनकर धन अर्जित कर सकते हैं। सबसे विशेष बात यह है कि वे जो भी व्यवसाय या वृति चुनेंगे उसमे पूरा सामंजस्य रखते हैं। सुन्दर व आकर्षक वस्तुओं को खरीदते समय खर्च की परवाह नहीं करते।

शुभ नग

तुला राशि वालों को एक रति या इस से अधिक वजन का हीरा या मोती प्लाटिनम या तीन धातु की अंगूठी में जड़वाकर शुक्र के बीज मन्त्र “ॐ द्राँ द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” का 16 हजार बार जप करके मध्यम उँगली में शुभ मुहूर्त में धारण करना चाहिए।

शुभ रंग

सफ़ेद व हल्का नीला रंग शुभ होता है

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