मीन राशि Pisces परिचय और स्वाभाव के बारे में जानिये

मीन राशि : दि, दु, थ, झ, दे, दो, चा, ची

Meen Rashi करुणा और दया की प्रतीक है यह मध्यम देह, स्त्री राशि, पिंगल वर्ण, ब्राह्मण जाति, जल तत्व, द्विस्वभावा, सौम्य प्रकृति, दिवा बली, सतोगुणी, कफ प्रकृति, सम संज्ञक, उत्तर दिशा की स्वामिनी है।

मीन राशि का स्वामी गुरु है मीन राशि में उत्पन्न जातक बुद्धिमान, गंभीर एवं सौम्य प्रकृति, परोपकारी कार्य करने में तत्पर, सत्यप्रिय, धर्म- कर्म एवं साहित्य एवं गूढ़ विद्याओं की ओर विशेष अभिरुचि रखेगा।

उच्चाभिलाषी, महत्वकांक्षी, एवं स्वाभिमानी प्रकृति अपनी मर्यादा एवं प्रतिष्ठा का विशेष ध्यान रखेगा। सेवा भाव रखने वाला, तीव्र बुद्धि, उद्यमी, दूरदर्शी व्यवहार कुशल एवं नीति के अनुसार आचरण करने वाला होगा।

विश्वसनीय, ईमानदार तथा हर प्रकार से मित्रों सगे-सम्बन्धियों के लिए सहायक होगा। परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेने की क्षमता होगी।

दूसरों पर न तो अन्याय करेंगे और ना ही किसी भांति अन्याय को सहन करेंगे। मीन राशि वाले जातक कलाकार, चलचित्र-व्यवसाय, खाने पीने की वस्तुओं से संबंधित अध्ययन संबंधी कार्यों में सफल होते हैं।

मीन राशि के जातकों में घर में शांति और आराम से बैठे रहने की प्रवृत्ति होती है। इससे उनमें आलसीपन आ सकता है।

जल के प्रति उनका विशेष होता है इस राशि के जातक फेफड़े, बुखार, पेट में गैस आदि बीमारियों से ग्रस्त रहते हैं।

स्त्री वर्ग – मीन जातिका का बाह्य रूप पूर्णतः एक नारी का रूप होता है। उसकी विशेषता पुरुषों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

अंदर से वह कठोर बेहतर जीवन अपनाने में भी सक्षम हो सकती है दीन-दुखियों के प्रति उदारता रखती है। कला के प्रति उनका प्रेम उनके घर को संग्रहालय बना देता है।

Meen Rashi वालों को बृहस्पति वार का व्रत तथा केसर का तिलक लगाना शुभ रहेगा।

शुभ नग- इस राशि वालों को पुखराज रत्न 5,7,9 रत्ती के वजन का सोने की अंगूठी में धारण करना चाहिए।

अंगूठी को स्वर्ण एवं ताम्र के वर्तन में कच्चा दूध, गंगाजल, पीले फूल एवं ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः के बीज मंत्र द्वारा अभिमंत्रित करके धारण करना चाहिए।

शुभ वार- मंगल, बृहस्पति, शनि एवं रविवार शुभ होंगे।
शुभ रंग – बैंगनी व हल्का जामुनी एवं पीला रंग

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