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योग से दिल को रखें स्वस्थ | Heart Care Yoga Tips in Hindi

Heart Care Yoga Tips in Hindi

Heart Care Yoga Tips in Hindi बहुत प्राचीन भारतीय पद्धति है योग। बीच के कुछ समय में योग हमारे देश में विलुप्त सा हो गया था मगर अब फिर से योग एक क्रांति की तरह उभरा है यही नहीं विश्व भर में योग की ख्याति पहुँचायी है आईये जानते कुछ योग आसनों के बारे में।

 

अंजली मुद्रा (Anjali Mudra)

Anjali Mudra

यह आसन करने के लिए आराम से बैठ जाएँ। लगातार गहरी सांसे लें और दोनों हथेलियों को आपस में जोड़े।

हथेलियों को इस तरह मिलाये ताकि उनके बीच थोड़ी सी जगह बनी रहें।

अब दोनों अंगूठों को छाती से थोड़ा टिकाएं रखें। अपना पूरा ध्यान हथेलियों पर लाएं और संतुलन बनाएं रखें।

फिर गर्दन को हल्का सा झुकाएं और छाती को फुलायें,साँस लेते रहें। शुरुआत में थोड़ी-थोड़ी देर करें ,धीरे -धीरे समय बढ़ाएं।

क्या है इसके लाभ

यह योग मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत लाभकारी है ।

अवसाद व तनाव को दूर करने में मददगार साबित होता है।

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सेतु बंधासन (Setu Bandhasana)

Setu Bandhasana

इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेट जाइए और दोनों हाथो को शरीर के साथ लंबाई में रखें।

धीरे -धीरे घुटने मोड़ते हुए कमर को ऊपर की ओर उठाइये।

वजन हाथों पर डालकर पैरों को मजबूती से टिकाएं रहें। कुछ देर इस स्थिति में रहे।

ध्यान रहे ऐसा करते वक़्त साँस को अंदर की ओर लेना है।

अब धीरे -धीरे साँस छोड़ते हुए पहले वाली अवस्था में आ जाएं।  इस क्रिया को 3 से 4 बार दोहराएं।

क्या है इसके लाभ

साँस लेने की क्रिया दुरुस्त होने की वजह से ये दिल के लिए अच्छा है।

कई प्रकार के दर्द से भी राहत दिलाता है जैसे कमर दर्द ,पेट दर्द और जाघों आदि।

 

शवासन (Shavasana)

shavasana

पीठ के बल लेट जाएं। दोनों हाथों को शरीर से थोड़ा दूरी पर रखे। हथेलियां आसमान की ओर रहें।

दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें । अब शरीर के एक-एक अंग पर ध्यान केंद्रित कर उन्हें बिलकुल ढीला छोड़ें।

मुंह ओर आँख दोनों बंद हो। पूरा ध्यान साँस पर हो और किसी प्रकार के विचार मन में न आने दें।

धीरे -धीरे श्वास क्रिया से ध्यान शरीर पर लेकर आएं। कुछ देर इस अवस्था में रहने के बाद सामान्य अवस्था में लौट आएं।

क्या है इसके लाभ

मानसिक व शारीरिक तनाव दूर करने के साथ मस्तिस्क की कार्यसमता बढ़ाने को बढ़ाता है।

मधुमेह के इलाज में भी यह योग बहुत कारगर है।

 

त्रिकोणासन (Trikonasana)

Trikonasana

पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखते हुए सीधे खड़े हो जाएं। दाएं पैर को उसी दिशा में बाहर की ओर मोड़ें।

बाएं हाथ को ऊपर की दिशा में ले जाते हुए कमर को दायीं ओर झुकाएं।

इस स्थिति में दाईं हथेली जमीन से सटी होनी चाहिए। उठे हुए हाथ की उंगली पर नज़र रखें।

फिर धीरे से सामान्य अवस्था में आएं। हाथ बदलकर – बदलकर इस क्रिया को करें।

बेहतर परिणाम के लिए इसे 15 से 20 बार करें।

क्या है इसके लाभ

त्रिकोणासन पेट की अतिरिक्त चर्बी दूर करने और पाचन क्रिया सुचारु करने में भी लाभदायक है।

यह आसन पैरों ,घुटनों ,एड़ियों और हाथों को मजबूत बनाता है।

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