reasons of snoring

क्या आप भी अपनी खर्राटे लेने की आदत से परेशान हैं?

Why do i Snore क्या आप जानते हैं कि हम खर्राटे क्यों लेते हैं?

जब हम सांस अंदर खींचते हैं तो हमारे गले के शिथिलीकृत ऊतक आपस में थरथराते हैं जिस वजह से खर्राटे जैसी आवाज़ सुनाई देती है।

यूएस के आधे से ज़्यादा वयस्कों में इस तरह की आदत देखी जाती है। अधिक वजन, स्वास्थ और मुंह का आकार आदि जैसे कई कारक इस आवाज़ को और भी भयानक बना देते हैं।

अपनी इस आदत को किस तरह पहचानें ?

अक्सर हमारे साथ सो रहे व्यक्ति को को नींद में भी यह सुनाई दे जाते हैं। अगर आप भी खर्राटे मारते हैं तो कई बार आपने अपने साथी को इस तरह की शिकायत करते हुए सुना होगा।

परंतु फिर भी अगर आपको उन पर विश्वास नहीं है और या फिर आप अकेले सोते हैं, तब भी आप अपनी इस आदत को पहचान सकते हैं। सोने से पहले अपने फोन का रिकॉर्डर ऑन करके आप इस आदत का पता लगा सकते हैं।

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बंद या भरा नाक

कोई भी चीज़ जो आपको नाक से सही तरीके से सांस लेने में दिक्कत देती है वह आपके खर्राटे का कारण बन सकती है।

इसलिए जुकाम जैसी बीमारी की वजह से भी व्यक्ति खर्राटे लेने लग जाता है। जुकाम के लिए दी गई दवाइयों अक्सर नाक के वायुपथ को खोल देती हैं जिससे सांस लेने में तकलीफ़ नहीं होती और खर्राटे से भी राहत मिल जाती है।

पीठ के बल पर सोना

अगर आप सीधा हो कर लेटते हैं तो यह आपकी तकलीफ़ को और भी बढ़ा सकता है। इस अवस्था में खर्राटों की आवाज़ और भी तेज़ और भयानक हो जाती है।

इसलिए एक तरफ होकर सोने या फिर अपने साथी को पकड़कर सोने से राहत प्राप्त हो सकती है। अगर तब भी आपको लगता है की रात में आप पलट कर सीधे हो जाते हैं तो आप अपनी शर्ट के कंधों पर जेब को सील कर, उसमें टेनिस बॉल डालकर सो सकते हैं

ताकि रात को अगर आप सीधे होते हैं तो आपको तकलीफ़ हो और आप उस अवस्था में ना सो पाएं। अपनी एक तरफ तकियों को पकड़कर सोने से भी बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।

नाक का आकार

यदि आपके नासिका के बीच की दीवार सही तरह से नहीं बनी तो परिणाम स्वरूप एक तरफ का आकार दूसरे की तुलना में छोटा रह जाता है जिसे भटक अनुनासिक पट भी कहा जाता है।

साधारण भाषा में कहें तो इसे नाक की हड्डी टेढ़ा होना कहा जाता है। इस बीमारी की वजह से सांस लेने में तकलीफ़ होती है और खर्राटे सुनाई देते हैं।

अगर आपको इस तरह के कई संकेत दिखाई देते हैं तो अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। सर्जरी द्वारा इस बीमारी का इलाज किया जा सकता है।

मुंह का आकार

अगर आपके गले का नरम तालु वाला हिस्सा कुछ अधिक मोटा और नीचे है तो आपका वायुपथ संकीर्ण हो जाता है और खर्राटे सुनाई देते हैं।

नरम तालु से लटकता हुआ ऊतक जिसे अलिजिह्वा भी कहा जाता है, अगर यह ऊतक सामान्य से कुछ लंबा हो, तब भी खर्राटे की आवाज़ सुनाई देती है।

क्या आप की दवाइयां भी इसका एक कारण हैं?

अक्सर नींद की दवाइयां, मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाइयां और एंटी डिप्रेसेंट हमारे गले और जीभ की मांसपेशियों को आराम प्रदान करती हैं।

इसलिए अगर आप खर्राटे लेते हैं और इस तरह की दवाइयों को ग्रहण करते हैं, तो आप अपने डॉक्टर को संपर्क करके दवाइयाँ बदलवा सकते हैं।

स्लीप एपनिया 

यह खतरनाक बीमारी सोते हुए हमें सांस लेने से रोकती है।

यह 1 सांस के लिए आपको नींद में तड़पा सकती है। मुंह सूखना, सर दर्द  व गले में खराश आदि इस बीमारी के मुख्य संकेत हैं।

अधिक और बड़ता हुए बीपी, हृदय रोग आदि इस बीमारी की ओर इशारा करते हैं। इन सभी संकेतों को नज़रअंदाज ना करते हुए हमें तुरंत डॉक्टर को संपर्क करना चाहिए।

वह हमें एक ऐसा यंत्र प्रदान कर सकते हैं जिससे हमें नींद में सांस लेने में तकलीफ ना हो और सर्जरी द्वारा भी इसका इलाज किया जा सकता है।

क्या आपके बच्चे भी खर्राटे लेते हैं?

बच्चों में यह बीमारी बहुत कम पाई जाती है परंतु जुकाम, एलर्जी जैसी परेशानियों की वजह से कई बार बच्चे भी नींद में खर्राटे लेते हैं। यह सब साइनोसाइटिस, गले और नाक के वायुपथ में खराबी होने के संकेत हैं।

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अगर आप गर्भवती हैं तो आपको इन खर्राटों के लिए क्या करना चाहिए?

गर्भवती महिलाओं में यह आदत अक्सर देखी जाती है। गर्भावस्था के दौरान उनके नाक का वायुपथ सूख जाता है जिससे सांस लेने में तकलीफ़ होती है।

गर्भावस्था में बढ़ रहा वजन भी हमारे मध्यपट को नीचे की तरफ धक्का मार देता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को इन सभी चिन्हों को ध्यान से पहचानना चाहिए और डॉक्टर से मिलना चाहिए।

किस तरह रखें वजन का ध्यान

अधिकतर खर्राटे लेने वाले लोग मोटापे का शिकार होते हैं जो कि उनकी तकलीफों को और भी बढ़ा देता है। इसलिए अपने वजन पर नियंत्रण रखना बेहद आवश्यक है।

शराब पीना कम करना होगा फायदेमंद

कई प्रकार की दवाइयों और पेयों से हमारे गले और जीभ की मांसपेशियों को आराम प्राप्त होता है जिससे खर्राटे की दिक्कत सामने आती है। इसलिए शाम के समय इस तरह के पेयों का सेवन ना करना भी लाभदायक साबित हो सकता है।

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