हाँग काँग विरोध प्रदर्शन : क्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी ?

हांगकांग प्राधिकारियों ने औपचारिक रूप से अप्रसिद्ध प्रत्यर्पण बिल को वापिस लेने का फैसला कर लिया है। कई महीनों से चल रहे विवादों को नज़र में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।

सुरक्षा प्रमुख 23 अक्टूबर को शहर के विधान सभा में इस फैसले की औपचारिक घोषणा करें।

ताइवान में एक हांगकांग पुरुष पर अपनी गर्लफ्रेंड की हत्या करने का आरोप लगाया गया था, इसी केस को सुलझाने के लिए कैरी लेम ने कुछ संशोधनों का प्रस्ताव रखा था। परंतु इस प्रत्यर्पण विधेयक की वज़ह से हजारों लोगों ने सड़क पर उतार कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। जनता के इस उग्र प्रदर्शन से सरकार ने इस बिल को वापिस लेने का फैसला किया है।

इन प्रदर्शनों ने शहर में सार्वभौमिक मताधिकार और पुलिस के कार्य में स्वतंत्र जांच जैसी मांगों को पैदा कर दिया था

कैसे हुई इन प्रदर्शनों की शुरुवात?

यह सरकार विरोधी प्रदर्शन कई महीनों से लगातार हांगकांग में अशांति फैला रहे थे और इनके खत्म होने के कोई आसार नज़र नहीं आ रहे थे।

इन प्रदर्शनों का आरंभ मुख्य भूमि चीन को प्रत्यर्पण की अनुमति देने के प्रस्तावों के खिलाफ असेहमती व्यक्ति करने के लिए किया गया था।

आलोचकों के अनुसार यह बिल शहर की न्यायिक स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा खतरा है और विरोधी लोगों के लिए यह जोखिम पैदा करेगा।

1977 के समय से हांगकांग एक ब्रिटिश उपनिवेश था यानी कि इसका नियंत्रण ब्रिटेन द्वारा किया जाता था। परंतु चीन शासन में लौटने के बाद से यह मुख्य भूमि से अधिक स्वशासी है और इसे अधिक अधिकार प्राप्त हैं। इस तरह की व्यवस्था को “एक देश और दो प्रणाली” कहा जाता है।

शहर के लीडर कैरी लेम द्वारा इस बिल को निलंबित करने का फैसला किया गया था परन्तु प्रदर्शनकारियों ने पूर्ण लोकतंत्र और पुलिकर्मियों के कार्य की जांच करने की मांग पेश कर दी थी।

सितंबर में बिल को वापिस ले लिया गया था। परंतु पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के किस्से उग्र होते हुए नज़र आने लग गए थे। कई पुलिसकर्मियों पर गोलियों और पेट्रोल बम के साथ हमला किया गया था।

विरोधियों के अनुसार इस बिल के लागू होने से चीन को हांगकांग पर अधिकार बढ़ जाएंगे जिसका इस्तेमाल वह कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को दबाने में कर सकते हैं।

हज़ारों की संख्या में लोगों ने इस फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया था। इतने दिनों तक चल रहे प्रदर्शनों को देखते हुए कैरी लेम ने इस वापिस लेने का निर्णय लिया था।

किस तरह तीव्र हुए प्रदर्शन?

प्रदर्शनकारियों में यह भय था कि इस फैसले को पुनर्जीवित ना कर दिया जाए इसलिए उन्होंने अपने प्रदर्शनों को जारी रखा और सरकार से इस फैसले को पूरे तरीके से वापिस लेने का दबाव डाला। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ता हुआ नजर आने लगा गया था।

जुलाई में प्रदर्शनकारियों ने संसद पर हमला कर दिया था। कुछ बदमाशों ने भी ईयून लोंग स्टेशन में घुस कर प्रदर्शनकारियों पर लाठियों से हमला किया था।

अगस्त में भी प्रदर्शनकारियों पर हुए एक हमले में एक व्यक्ति के बुरी तरह घायल होने की खबर सामने आई थी। उन्हें आँख पर गहरी चोट आई थी। इस सबसे उग्र हो कर प्रदर्शनकारियों ने आँख पर लाल रंग की पट्टी पहन कर विरोध करना शुरू कर दिया था।

हांगकांग अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हुए हमले की वजह से भी कई फ्लाइटों को रद्द कर दिया गया था। इन सभी वारदातों की वजह से पुलिस और विरोधियों में तनाव बढ़ता ही चला गया।

आखिरकार सितंबर में बिल को वापिस ले लिया गया था परन्तु विरोधियों को यह फैसला संतुष्ट नहीं कर पाया। उनका कहना था कि अब बहुत देर हो चुकी है।

1 अक्टूबर को जब चीन कम्युनिस्ट पार्टी के शासन का जश्न मना रहा था वहीं दूसरी ओर उसी समय हांगकांग अपने सबसे हिंसक और अस्तव्यस्त दिनों से गुज़र रहा था।

18 वर्ष के एक युवक की पुलिस द्वारा सीने में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। बदले में विरोधियों ने भी गोलियों, पेट्रोल बम व अन्य शस्त्रों से प्रशासन पर हमला किया था।

सरकार ने प्रदर्शनकारियों के फेस मास्क लगाने पर पाबंदी लगा दी है परन्तु इन सब प्रतिबंधों का प्रदर्शनकारियों पर कोई असर होता हुआ नज़र नहीं आया था।

क्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी?

इन सब का एक ही आदर्श – वाक्य था ” पांच माँगें, ना इससे एक कम”

  • प्रदर्शनों को “दंगों” का नाम ना दिया जाए।
  • गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को सर्व -क्षमा प्रदान कि जाए।
  • पुलिस की निर्दयता पर एक स्वतंत्र पूछताछ चलाने की अनुमति।
  • सम्पूर्ण सार्वजनिक मताधिकार का कार्यान्वयन।

पांचवी मांग बिल को वापिस लेना थी जो कि पहले ही पूरी ही चुकी है। कई विरोधियों को कैरी लेम के इस्तीफे का भी इंतजार था क्योंकि उन्हें बीजिंग की कठपुतली माना जाता है। चीन के राष्ट्रपति झी जिनपिंग ने लोगों को पृथकतावाद के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा था कि चीन का विभाजित करने का परिणाम बहुत बुरा होगा, शवों को नष्ट कर दिया जाएगा और हड्डियों को पाउडर में तब्दील कर दिया जाएगा।

क्या है हांगकांग की वर्तमान स्थिति?

हांगकांग एक ब्रिटिश उपनिवेश था जिसे 1997 में चीन को सौंप दिया गया था। इस शहर का अपना अलग न्यायतंत्र है और मुख्य भूमि चीन से अलग कानूनी प्रणाली है। इन सभी अधिकारों में सदन कि स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रमुख हैं।

2047 में शहर के बाकी सामान्य कानूनों की समय सीमा भी समाप्त हो जाएगी परंतु इस बात अंदाज़ा लगाना बेहद मुश्किल है कि उस समय हांगकांग किस स्थिति में होगा।

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