क्या है Dopamine Fasting का ट्रेंड

क्या है Dopamine Fasting का ट्रेंड?

Dopamine Fasting : क्या आप भी 16 घंटों तक भूखे रहने वाले व्रत में विश्वास रखते हैं? अगर आपका जवाब हां है, तो हम आपके लिए एक बेहद ही अच्छी खुशख़बरी लेकर आए हैं।

अब आपको इस तरह का कोई भी व्रत रखने की आवश्यकता नहीं है। हम आपको एक ऐसे व्रत के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि इस समय सबसे प्रचलित है।

16 घंटे तक भूखे रहने वाले व्रत तो गुज़रे ज़माने की बात हो गई , आजकल तो डोपामिन फास्ट का ज़माना है।

इस फास्ट का अर्थ है कि उन सभी चीजों का त्याग कर देना जिनसे हमें अत्यंत सुख प्राप्त होता है। इन सभी सुखों में नेटफ्लिक्स चलाना, दोस्तों के साथ चुगली करना या मनपसंद चीजों की शॉपिंग करना आदि भी शामिल होता है।

इस तरह के व्रत के फ़ायदों के बारे में विश्व भर में चर्चा की जा रही है। अभी भी विशेषज्ञों के लिए यह एक विवादग्रस्त मुद्दा है।

सबसे पहले इसकी खोज किसने की थी इस बात का सही रूप से ज्ञान नहीं है परंतु रिचर्ड नाम के एक व्यक्ति ने इस बारे में यूट्यूब पर एक वीडियो पोस्ट किया था जोकि बेहद ही वायरल हो गया था।

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रिचर्ड ने नवंबर 2018 में ‘इंप्रूवमेंट पिल’ नाम के एक यूट्यूब चैनल पर डोपामिन फास्ट से संबंधित वीडियो पोस्ट किया था जिस पर कुल 1.7 मिलियन व्यूज़ प्राप्त हुए थे।

डोपामिन फास्ट (Dopamine Fasting) का अर्थ है कुछ समयकाल के लिए नशे, यौन क्रिया, शराब, जुआ, ड्रग्स, व सोशल मीडिया से परहेज़ करना। इसका उद्देश्य है कि शांत दिमाग और बेहतर दृष्टि से इस व्रत को सफलतापूर्वक पूरा करना।

लीबरोस नाम की ब्रेन रिसर्च कम्पनी की मुख्य कार्यपालक अधिकारी और तंत्रिका वैज्ञानिक निकोल प्रौस का कहना है कि विज्ञान की सहायता के बिना शरीर में डोपामिन के स्तर को घटाने बढ़ाने का कुछ खास प्रभाव नहीं होगा।

उन्होंने इस फास्ट के विरुद्ध जाते हुए कहा है की अगर लंबे समय तक आप इसका पालन करेंगे तो हो सकता है कि फास्ट के समयकाल के दौरान आपको अधिक खुश न महसूस हो और फास्ट पूरी ना कर पाने के कारण आप और भी दुखी और शर्मसार महसूस करें। इसलिए दोनों ही स्थितियों में यह आपके लिए सही नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि डोपामिन से संबंधित प्रसन्नता ही एक अकेला भाव नहीं है। डोपामिन फास्ट केवल प्रसन्न यानी अभिराम पर ही आधारित है इसलिए केवल इस पर नियंत्रण रखने से अधिक लाभ नहीं हो सकता।

डोपामिन एक ऐसे न्यूरोट्रांसमिटर है जो कि यौन उत्तेजना या आक्रमण जैसे भावों की मौजूदगी में उद्दीप्त होता है।

इसे ‘ फील गुड’ न्यूरोट्रांसमिटर भी कहा जाता है। प्रौस ने कहा कि यह अन्य भावों जैसे कि प्रेरणा व सुदृढीकरण आदि के लिए भी आवश्यक होता है।

दूसरी तरफ डोपामिन फास्ट Dopamine Fasting के हक में बोलते हुए यूसी सैन फ्रांसिस्को की नैदानिक प्रोफेसर कैमेरॉन सिपाह ने कहा कि मीडिया के गलत चित्रण की वजह से जनता को इस फास्ट के बारे में कई ग़लतफ़हमियाँ हैं।

सिपाह ने अगस्त में लिंक्डइन पर इस फास्ट पर आधारित एक आर्टिकल भी छापा था जिसका शीर्षक था – “द डिफिनिटिव गाइड टू डोपामिन फास्टिंग 2.0 – द हॉट सिलिकॉन वैली ट्रेंड”।

उन्होंने कहा कि डोपामिन फास्ट Dopamine Fasting का उद्देश्य डोपामिन के स्तर पर नियंत्रण रखना नहीं है बल्कि कुछ समयकाल के लिए आवेगी व्यवहार या अधिक उत्तेजना पैदा करने वाली आदतों पर नियंत्रण रखना है।

उन्होंने बताया कि इसमें सीबीटी तकनीक की सहायता ली जाती है। सीबीटी का अर्थ है कॉग्निटिव बिहेवरल थेरेपी यानी कि संज्ञानात्मक व्यवहारवादी रोगोपचार।

कैमेरॉन ने कहा कि हमें हर तरह के व्यवहार पर पाबंदी लगाने की जरूरत नहीं है बल्कि सिर्फ उन व्यवहारों पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है जिनसे हमें दिक्कत हो रही हो , जैसे कि अधिक समय तक फेसबुक चलाना या ज़रूरत से ज़्यादा शॉपिंग करना आदि।

इस तरह उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फास्ट खुशी या प्प्रसन्नता पर रोक नहीं लगाता बल्कि उससे पैदा होने वाले आवेगि व्यवहारों पर रोक लगाता है।

उन्होंने कहा कि लोगों को इस फास्ट को बाहरी उत्तेजनाओं यानी फोन, टीवी आदि पर प्रतिबंध लगाने के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने इसे स्टिमुलस कंट्रोल थेरेपी भी कहा।

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डॉ जे हॉलिस्टिक हैल्थ एंड वैलनेस के संस्थापक

कैथेराइन जैक्सन ने भी कहा कि शरीर में डोपामिन का स्तर बढ़ने से हमें सुख और खुशी महसूस होती है। जब हम अपनी मनपसंद चीजें करते हैं तो शरीर में डोपामिन का स्तर बढ़ जाता है और हमें आनंद महसूस होता है।

परंतु अधिक मात्रा में मौजूद हर पदार्थ का नुकसान भी अवश्य होता है। जिस प्रकार फोन पर घंटी बजते ही हमें तुरंत ही खुशी महसूस होती है और डोपामिन का स्तर एकदम से बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि सीबीटी इस तरह अधिक उत्तेजना पैदा करने वाले व्यवहारों पर नियंत्रण रखने में सहायता करता है।

उन्होंने साफ शब्दों में यह कहा कि इस फास्ट को रखते हुए हमें डोपामिन स्तर के बारे में सोचने की जगह यह सोचना चाहिए कि जिन चीजों पर हम अधिक निर्भर हो रहे हैं, उन पर प्रतिबंध लगाना बेहद आवश्यक है और लंबे समय में इससे हमें ही लाभ प्राप्त होगा।

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