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यूपी सरकार ने लगाए ख़ान पर नए आरोप

यूपी सरकार ने वीरवार को कहा कि डॉक्टर कफील खान के ख़िलाफ़ से एक ताज़ा पूछताछ शुरू की जाएगी। उनके अनुसार कफील ने रिहा होने पर जांच रिपोर्ट पर गलत तथ्य मीडिया के सामने पेश किए थे और सरकार के विपक्ष में कई गलत बातें कही थीं। इस सबके चलते उनके ख़िलाफ़ फिर से मुकद्दमा दर्ज किया गया है।

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खान गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में बाल चिकित्सक के रूप में काम करते थे। 2017 में उनके रहते हुए हस्पताल में 63 बच्चों की ऑक्सीजन ना मिल पाने करके मृत्यु हो गई थी।

राज्य सरकार ने भी खान पर भगदड़ मचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि 2018 में भी वह ज़ोर ज़बरदस्ती से बहराइच डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के बल चिकित्सा विभाग में घुस आए थे।

उनके ख़िलाफ़ अब कुल 7 शिकायतें दर्ज हैं जिसमें से पुरानी 4 पर अभी भी विभाग की तरफ से एक्शन लेना बाकी है।

खान को चिकित्सा लापरवाही और भ्रष्टाचार के जुर्म में नौ साल की सज़ा सुनाई गई थी। पिछले ही हफ़्ते राज्य सरकार ने खान को इन सभी मुक़द्दमों से मुक्त कर दिया था और बच्चों को बचाने के लिए उनके प्रयासों को भी स्वीकार किया था। रिपोर्ट के अनुसार खान की चिकित्सा लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं थे। इंक्वायरी से यह भी स्पष्ट किया गया कि वह ना ही वार्ड में हो रही मौतों के ज़िम्मेदार थे और ना ही लिक्विड ऑक्सीजन के भंडारण या व्यवस्था के लिए। यह भी कहा गया कि खान दुर्घटना के दौरान किसी भी प्रकार की प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर रहे थे। सभी सबूतों को बेतुका करार दिया गया।

परंतु वीरवार को यूपी मेडिकल एजुकेशन विभाग के प्रमुख सचिव रजनीश दुबे ने खान के खिलाफ नयी जांच पड़ताल शुरू होने के बारे में बताया। रजनीश ही इस केस के जांच अधिकारी हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए दुबे ने कहा कि यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि खान एक सरकारी कर्मचारी होते हुए भी एक प्राइवेट नर्सिंग होम चलाते थे। उन्होंने बताया कि खान के इस जुर्म के ख़िलाफ़ अभी कारवाई की जाएगी और अन्य दो आरोपों पर भी जांच पड़ताल की जाएगी।

इसके विपरित डॉक्टर द्वारा यह ट्वीट किया गया कि योगी आदित्यनाथ की सरकार सिर्फ ज़रूरी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाना चाहती है। उन्होंने कहा कि खान के खिलाफ इतनी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की जगह, सरकार को हॉस्पिटल में लिक्विड ऑक्सीजन की कमी होने पर जवाब देना चाहिए।

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