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Tips for Night Shift Workers in Hindi | सेहत का ध्यान रखने के तरीके

Tips for Night Shift Workers in Hindi

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अगर आप रात कि शिफ्ट में काम करते है सेहत का ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक हो जाता है अगर अपने इस तरफ दिया तो कई तरह की बीमारियाँ आपको घेर सकती है इसलिए अपनी स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

Tips for Night Shift Workers in Hindi काम का निश्चित समय निर्धारित न होना लोगों के स्वास्थ्य को कई स्तरों पर प्रभावित करता है। उनके शरीर की लय गड़बड़ा जाती है। 

टूरिंग जॉब करने वालों के साथ यह समस्या अधिक होती है क्योंकि टाइमिंग के साथ-साथ वातावरण में बदलाव का असर भी उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है।

ऐसे में बहुत जरूरी है कि अपनी जीवनशैली, खानपान और नींद का विशेष ध्यान रखें ताकि बीमारियों की चपेट में आने की आशंका को कम किया जा सके।

अनियमितताएं

  • असमय खाना
  • भोजन की पौष्टिकता के साथ समझौता
  • देर तक रखा भोजन करना, बाहर का खाना अधिक खाना
  • अच्छी सेहत के लिए अच्छा पाचन तंत्र होना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है।

पाचन तंत्र की गड़बड़ियों का असर अन्य तंत्रों पर ही नहीं अंगों पर भी पड़ता है।

जो लोग रोटेटिंग शिफ्ट या नाइट शिफ्ट Tips for Night Shift Workers in Hindi में काम करते हैं या जिनका टूरिंग जॉब है वो अपने खानपान को लेकर काफी लापरवाह हो जाते हैं।

अगर उन्हें समोसे या सेब में से किसी एक खाना है तो वो समोसा खाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह ज्यादा समय तक उनकी भूख को शांत करेगा। खाने के समय को बार-बार बदलने से भी पेट गड़बड़ा जाता है।

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ये परिस्थितियां जिम्मेदार

  • शिफ्ट में काम करना
  • टूरिंग जॉब करना
  • गैस से लेकर अल्सर तक की समस्या हो सकती है
  • जो लोग अपने शिफ्टिंग जॉब के कारण नियत समय पर भोजन नहीं करते और शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहते
  • पाचन शक्ति कमजोर पड़ जाती है
  • गैस की समस्या हो जाती है।

जिन लोगों के काम का समय निश्चित नहीं होता उनमें हाई ब्लडप्रेशर, अनिद्रा, हृदय रोग और पाचन तंत्र से संबंधित समस्याएं आदि होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

अक्सर नाइट शिफ्ट या टूरिंग जॉब करने वाले आराम से चबा-चबाकर पोषक भोजन खाने की बजाए जल्दी-जल्दी खाना पसंद करते हैं।

यही वजह है कि इन्हें गैस की समस्या अधिक होती हैं।

लंबे समय तक गैस की समस्या अल्सर में बदल सकती है।

मानसिक तनाव से कब्ज़ की समस्या

कब्ज यानी बड़ी आंत से शरीर के बाहर मल निकालने में कठिनाई आना।

खानपान की गलत आदतें, शारीरिक निष्क्रियता और मानसिक तनाव कब्ज होने का प्रमुख कारण है।

जो लोग टूरिंग जॉब करते हैं उन्हें अक्सर अलग-अलग जगहों पर ट्रेवल करना पड़ता है।

ऐसे में खानपान और वातावरण में बदलाव से कब्ज की समस्या हो जाती है।

तीन महीने तक क‍ब्ज की समस्या इरीटेबल बॉउल सिंड्रोम हो सकती है।

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क्या करें

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए
  • तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन, व्यायाम या फिर पैदल चलना चुन सकते हैं
  • सर्वागसन, उत्‍तानपादासन, भुजंगासन जैसे योगासन करने से पाचन संबंधी विकार दूर होते हैं और पाचन तंत्र मजबूत होता है।

जंक फूड खाने से बचें

शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना, नियत समय पर खाना न खाना और सामान्य से अधिक वजन लोगों को एसिडिटी का आसान शिकार बना रहा है।

जो लोग नाइट शिफ्ट Tips for Night Shift Workers in Hindi में काम करते हैं वो घर आकर खाना खाकर तुरंत सो जाते हैं।

भूख लगने पर जंक फूड को खाना ऐसा लगातार करने से उनमें एसिडिटी का खतरा बढ़ जाता है।

क्या करें:- रात में जॉब के दौरान जंक फूड के बजाय भुने चने, मुरमुरे, नट्स जैसे बादाम, अखरोट आदि को खाना चाहिए।

पाचन तंत्र को रखें ऐसे दुरूस्त

  • जब भी सोकर उठें एक गिलास कुनकुना नींबू पानी अवश्य पिएं। अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन नहीं करना चाहिए।
  • खाने को धीरे-धीरे और चबाकर खाना चाहिए।
  • तीन बार पेट भर खाने की जगह 3 घंटों में थोड़ा-थोड़ा खाएं।
  • जिन लोगों को पहले से ही एसिडिटी है वो अधिक मसालेदार, खट्टे फल, चॉकलेट, पुदीना, टमाटर सॉस खाने से बचना चाहिए।
  • अपने भोजन में अधिक से अधिक रेशेदार भोजन को शामिल करें।
  • अच्छे बैक्टीरिया को सपोर्ट देने के लिए प्राबायोटिक भोजन जैसे दही और योगर्ट खाएं।
  • लहसुन और केला भी पाचनतंत्र को दुरूस्त रखने में मददगार है।

नींद की कमी बढ़ाती भूख के हार्मोन

शिफ्ट जॉब से अनिद्रा रोटेटिंग शिफ्ट्स, नाइट शिफ्ट्स Tips for Night Shift Workers in Hindi या टूरिंग जॉब करने वाले अधिकतर लोग पूरी नींद नहीं ले पाते।

अनजान जगहों पर सोना, सोने का समय निश्चित न होना, सोने के घंटे निश्चित न होना, स्लीप शेड्यूल को गड़बड़ा देता है।

लगातर नींद की कमी से अवसाद, एंग्जाइटी जैसे मानसिक रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

रोग प्रतिरोधक तंत्र भी कमजोर हो जाता है जिससे संक्रमण और रोगों की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है।

नींद की कमी शरीर में भूख का अहसास कराने वाले हार्मोंन का स्‍तर बढ़ा देती है जिसके कारण लोग अधिक मात्रा में खाते हैं।

अनिद्रा के कारण मेटाबॉलिज्म की दर धीमी हो जाने से भी मोटापा बढ़ता है।

नींद पूरी ना होने पर रक्तदाब बढ़ सकता है।

माइग्रेन यानी सिरदर्द हो सकता है, अगर माइग्रेन पहले से है तो उसके बढ़ने की आशंका रहती है।

नींद की कमी से पाचन तंत्र संबंधी समस्‍याएं जैसे कब्ज, बदहजमी, एसिडिटी हो सकती है।

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बचाव के तरीके

  • 6-8 घंटे की नींद लेने का हर संभव प्रयास करें
  • मानसिक शांति के लिए ध्यान करना चाहिए
  • ध्यान अनिद्रा में बहुत उपयोगी है

नियमित रूप से अधिक मात्रा में अल्कोहल के सेवन से नींद का पैटर्न गड़बड़ा जाता है।

स्मोकिंग से निकोटिन भी नींद में बाधा डालता है और उत्तेजना बढ़ाता है।

इसलिए इन दोनों से दूर रहिए। और अपने पास सुकूनभरी नींद बुलाएं। 

सोने के 4-5 घंटे पहले चाय- कॉफी लेने से बचिए।

सोने से एक घंटा पहले गैजेट्स का प्रयोग बंद कर दें।

अंधेरे में सोएं क्योंकि रोशनी में मेलेटोनिन का स्तर प्रभावित होता है जिससे अनिद्रा की समस्या बढ़ती है।

नाइट शिफ्ट Tips for Night Shift Workers in Hindi में काम करने के कारण दिन में सोते हैं तब भी दरवाजे, खिड़कियां बंद करें। परदे डालकर पूरी तरह अंधेरा करके सोएं।

शिफ्ट में बदलाव से सिरदर्द और तनाव

निश्चित शिफ्ट में काम नहीं करते उनपर लगातार ड्यूटी के बदलते समय के साथ जल्दी से जल्दी सामंजस्य बिठाने का दबाव बना रहता है।

जब उन्हें सोना चाहिए तब उन्हें जागना पड़ता है और जब जागना चाहिए तब उन्हें सोना पड़ता है।

इससे उनकी जैविक घड़ी गड़बड़ा जाती है। उत्पादकता प्रभावित होती है।

सही काम करने के लिए उन्हें मस्तिष्क पर अतिरिक्त दबाव डालना पड़ता है जिससे उन्हें सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या हो जाती है।

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