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The Family Man : Hindi Review

भारतीय मनोरंजन और रहस्यमयी कहानियों का एक अनोखा ही रिश्ता है। टेलीविजन और सिनेमा दोनों ही रहस्यमयी कहानियों से भरे पढ़े हैं परन्तु इस भीड़ में ऐसी बहुत कम कहानियां हैं जो दर्शकों का दिल जीतने में सफल हो पाई हैं।

मनोज बाजपेयी का नया शो ‘द फैमिली मैन‘ भी निराशा की इस लिस्ट में शामिल हो चुका है। 10 एपिसोड की इस डगमगाती कहानी से दर्शकों को कई बार निराशा का सामना करना पड़ सकता है।

राज निदिमोरू और कृष्णा डी.के. द्वारा निर्देशित यह सीरीज श्रीकांत तिवारी नाम के एक घरेलू इंसान पर आधारित है जो देश के उन सर्वश्रेष्ठ लोगों में से है जो आतंकवादी हमलों को रोकने का प्रयास करते हैं।

श्रीकांत का पारिवारिक जीवन कई संघर्षों से भरा है, उसके बच्चे भी उसे एक हरा हुआ इंसान समझते हैं। परंतु उसके ऑफिस में उसे स्टार माना जाता है। उसके सभी सहकर्मी उसकी बेहद इज्ज़त करते हैं। सहकर्मी जे. के (शारिब हाशमी) के साथ मिल कर वह आतंकवाद को रोकने और कई अपराधियों की पूछताछ में लगा रहता है।

एक आम घरेलू इंसान की ज़िंदगी पर बनी यह सीरीज बीच एपिसोड में ही दर्शकों का ध्यान भटका देती है। पहला एपिसोड मनोज की आम दिनचर्या से शुरू होता है जहां वो अपना दिन आलोम- विलोम से शुरु करता है और एक आम इंसान की तरह अपने बाज़ार के बैग के साथ घर की तरफ़ निकल पड़ता है।

बैग से निकलता हुआ धनिया एक आम इंसान की जिंदगी की तरफ़ ईशारा देता है। परंतु इस कहानी का आम इंसान के दिल में उतरना बेहद मुश्किल है। घरेलू जीवन और अतांकवाद में उलझी यह कहानी किसी भी किनारे तक पहुंचने में असफल रही।

द फैमिली मैन‘ की सबसे बड़ी कमी है उसका कहानी लेखन । पहले 5 एपिसोड पूरी शिद्दत के साथ व्यूअर्स का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करते हैैं परंतु इन एपिसोड्स में कुछ भी ऐसा नहीं है जो आपको आगे के एपिसोड देखने की प्रेरणा दे।

जिस तरह से कहानी को बताने की कोशिश की गई है, वह कुछ खास लाजवाब नहीं है । किसी भी किरदार को बखूबी तरीके से नहीं पेश किया गया। जहां एक तरफ़ श्रीकांत और सूची (प्रियामणि) अपनी बिखरी हुई शादि को फिर से समेटने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कहानी में पूर्व प्रेमिकाओं और सहकर्मियों का ज़िक्र भी किया जाता है ।

आपकी दिनचर्या से आठ घंटे चुराने के बाद भी, यह कहानी आपके सभी सवालों के जवाब देने में असफल साबित होगी। कहानी के अंत तक भी आप यह नहीं जान पाएंगे की आखिर इन दोनों की शादी इस मोड़ पर क्यों और कैसे आ खड़ी हुई ? यह बात साफ़ है कि सीरीज खत्म होने के बाद भी आपके मन में कई अधूरे सवाल बाकी रह जाएंगे।

इस सब के बाद आपके पास मनघड़ंत तर्क निकालने के सिवा कोई विकल्प नहीं रह जाएगा। एक टूटी हुई शादी जो की वक्त और हालात के चलते कमज़ूर होती चली गई। श्रीकांत और सूची की दो बच्चे भी हैं।

दोनों की ज़िंदगियों की अपनी अलग- अलग परेशानियां हैं। कहानी के इस तरह अधूरे रह जाने की वजह यह है कि सीरीज में आधे से ज़दा वक्त आर्मी की वार्तालाप को दिखाया जाता है, जिसे किसी भी पहलू से जोड़ पाना बहुत मुश्किल है।

कहानी एक होने वाले धमाके पर आधारित है जो कि 2008 में हुए 26/11 हमले से भी ज़्यादा खौफ़नाक है। इस धमाके को रोमांच बनाकर निर्देशक अंत तक व्यूअर को बांधने का प्रयास करता है परन्तु जब धमाके का वक्त आता है, तब आग की जगह सिर्फ चिंगारी नज़र आती है। धमाके के रूप में निर्माता पिछले दीवाली के बचे हुए अनार जनता को परोस देते हैं।

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