Thalassemia ka ilaj in Hindi

Thalassemia ka ilaj in Hindi | थैलीसीमिया पर नियंत्रण सम्भव है

देश में 35 लाख से ज़्यादा लोग थैलीसीमिया से पीड़ित हैं। आइए जानें इसके लक्षण और रोकथाम Thalassemia ka ilaj in Hindi के उपाय।

क्या है लक्षण Thalassemia signs

  • यह विकार जन्म के छह माह से एक वर्ष कि अवस्था में दिखाई देने लगता है।
  • शरीर में पीलापन दिखता है, और धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।
  • बच्चा थोड़े-थोड़े समय में बीमार भी होने लगता है।
  • थोड़े समय में त्वचा हलकी नीली से दिखने लग जाती है।
  • गाल हड्डियाँ उभरी हुई दिखती है, और दांत बाहर कि ओर निकले दिखते है।
  • ये लक्षण विशेष रूप से २-3 वर्ष कि आयु में दिखाई देते है।
  • थैलीसीमिया कोई बीमारी नहीं वंशानुगत ख़ून के विकार का नाम है।
  • इसमें व्यक्ति का शरीर उचित मात्रा में रक्त के लालकण (हीमोग्लोबिन) बनाने में असमर्थ होता है।
  • इसमें लालरक्त कणों का आकार भी छोटा होता है और उनकी आयु भी कम हो जाती है।
  • इस कारण से व्यक्ति में ख़ून की बहुत कमी हो जाती है, जिससे व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

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थैलीसीमिया कितने प्रकार का है Types of Thalassemia

  • यह विकार माइनर, मेजर और इन्टरमीडिया प्रकार का होता है।
  • माइनर थैलेसीमिया को थैलीसीमिया ट्रेट या थैलेसेमिया वाहक (कैरियर) भी कहते हैं।
  • इससे प्रभावित व्यक्ति में बीमारी के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, परन्तु जब ख़ून का परीक्षण किया जाए, तो इस बात का पता चलता है।
  • ये लोग अगली पीढ़ी को यह रोग विरासत में दे सकते हैं।
  • यदि किसी व्यक्ति को थैलीसीमिया है और उसका विवाह दूसरे थैलीसीमिया पीड़ित से होता है, तो उनकी संतान में 50% तक मेजर होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • वहीं इन्टरमीडिया से प्रभावित व्यक्ति की अवस्था मेजर और माइनर के बीच की होती है।
  • और इसके लक्षण चार से आठ वर्ष की आयु में दिखाई देते हैं।
  • इसका इलाज बीमारी की तीव्रता पर निर्भर होता है। थैलीसीमिया मेजर गंभीर अवस्था है।
  • इससे प्रभावित व्यक्ति को नियमित रूप से ख़ून चढ़वाने की आवश्यकता होती है।

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किन्हें हो सकती है बीमारी Who Can Have The Disease
  • थैलीसीमिया बच्चों को माता-पिता से मिलता है। यदि मां-बाप में से कोई भी वाहक नहीं है, तो बच्चे को यह विकार नहीं हो सकता।
  • यदि दोनों में से किसी एक को है, तो उनसे होने वाली संतान में 50% तक थैलीसीमिया माइनर होने की संभावना होती है।
  • यदि माता-पिता दोनों माइनर से प्रभावित है, तो केवल 25% तक की संभावना है कि संतान को थैलीसीमिया हो, 50% तक माइनर और 25% तक थैलीसीमिया मेजर की संभावना होती है।
  • अंतत: हो सकता है कि पति-पत्नी की हर संतान को थैलीसीमिया मेजर हो या माइनर हो या शायद भी हो।
  • यदि माता-पिता में से किसी एक को मेजर हो तो हर संतान माइनर से प्रभावित हो सकती है।
  • यहां यह जानना ज़रूरी है कि किसी बच्चे को जन्म के बाद यह नहीं हो सकता है।
इलाज कैसे किया जाता है Thalassemia ka ilaj in Hindi
  • इससे प्रभावित व्यक्ति को लाल रक़्त कणों की समय-समय पर आवश्यकता होती है, जिससे कि हीमोग्लोबिन 10% तक बना रहे।
  • इसके लिए लाल रक़्त कण युक्त रक्त शरीर में चढ़ाया जाता है।
  • अमूमन हर बीस दिन बाद एक यूनिट रक्त की आवश्यकता व्यक्ति को होती है, किसी को 2 यूनिट भी देना पड़ सकता है।
  • इसी प्रकार किसी व्यक्ति को 1-5 सप्ताह के अंतराल में भी ख़ून दिया जाता है।
  • यदि इस विकार का उचित और समय पर इलाज किया जाता रहे, तो थैलीसीमिया मेजर से प्रभावित व्यक्ति साधारण व्यक्ति की तरह ही जीवन जी सकता है।

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संभव है रोकथाम Possible prevention

  • इसका इलाज केवल बोन मैरो ट्रांसप्लान्ट से ही संभव है। यह जितनी जल्दी कराया जाए उतना  अच्छा।
  • इसके लिए बोन मैरो दाता की आवश्यकता होती है।
  • अच्छा दाता सगे भाई-बहन होते हैं। जिन्हें थैलीसीमिया ट्रेट या थैलीसीमिया मेजर हो वे किसी माइनर तक से शादी करें।
  • यदि दो थैलीसीमिया वाहक विवाह करते है, तो उनके शिशु की गर्भ में रक्त की जांच की जाती है और मेजर की संभावना नज़र आए तो गर्भपात ही उपाय है।

 

 

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