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Stutter Symptoms, Diagnosis in Hindi | हकलाहट को करें दूर

Stuttering Symptoms, diagnosis, and causes

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बचपन में अक्सर बच्चे अटक-अटक (Stutter Symptoms, Diagnosis in Hindi) कर बोलते हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ भी यदि बच्चा बोलते-बोलते हकलाने लगे, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें।

बचपन में बच्चों का तुतलाना, शब्दों को अटक-अटक कर बोलना या बोलते हुए हकला जाना बहुत सामान्य होता है। बच्चों के मुंह से तुतलाते हुए शब्द बेहद प्यारे लगते हैं। हालांकि माना जाता है कि बच्चों के तुतलाने को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।

फिर भी यदि 2 से 3 साल तक के बच्चे हकलाएं या तुतलाएं तो सामान्य बात है पर यदि उम्र बढ़ने के साथ भी बच्चा हकला रहा है या शब्दों को एक साथ नहीं बोल पा रहा तो यह सामान्य नहीं है। इससे बच्चे में स्टैमरिंग यानी कि हकलाहट की समस्या सामने आती है।

शुरुआत में पहचाने

यह समस्या कई बार इतनी बढ़ जाती है। कि बच्चे को अपनी बात पूरी करने में काफी वक़्त लग जाता है।

और बच्चे  हीनभावना से ग्रस्त हो जाते हैं।

यदि 4 से 5 साल की उम्र के बाद भी बच्चा अपनी बात पूरी करने में समय ले रहा है

या एक छोटे से वाक्य को बोलने में सामान्य से अधिक वक़्त ले रहा है तो इसे उसकी शैतानी न समझें।

उसकी परेशानी को वक़्त रहते समझकर, चिकित्सक से सम्पर्क करें।

बड़ी वजह है डर

माता-पिता जब बच्चों को किसी बात पर डांट देते हैं या डरा देते हैं।

तब भी बच्चा अपनी बात को पूरा नहीं कर पाता या बोलते हुए कई बार बीच में रुक जाता है।

कई बार माता-पिता मेहमानों के सामने बच्चे से कविता सुनाने की ज़िद करते हैं।

जिस वजह से बच्चा घबरा सकता है। और बोलते वक़्त हकलाने लगता है।

ऐसे में बच्चे की स्थिति को समझते हुए उससे प्यार से बात करें और आराम से बोलने के लिए प्रोत्साहित करें।

न कि जल्दी या कम समय में बोलने के लिए दबाव बनाएं।

साथ ही जब बच्चा हकलाते हुए बोले तो बार-बार उसे ठीक करने की कोशिश न करें।

दबाव बनाने या अधिक ज़ोर लगाकर बोलने की ज़िद के कारण बच्चे शब्द को पूरा नहीं बोल पाते और बीच में ही रुक जाते हैं।

बच्चे को उसकी क्षमता के अनुसार बोलने दें। इससे वह अपनी बात आराम से बिना डर के रख सकेगा।

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अनुवांशिक हो सकती है स्टैमरिंग

कुछ बच्चों में हकलाने की समस्या उम्र बढ़ने पर समझ में आती है।

जबकि कुछ में पैदायशी होती है।

इस समस्या का कारण परिवार में पहले किसी सदस्य में यह समस्या का होना भी शामिल है।

यदि बच्चे के दादा या पिता को इस तरह की समस्या रही है तो बच्चा भी इस समस्या से ग्रसित हो सकता है।

महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह समस्या अधिक पाई जाती है।

लेकिन इसे आसानी से दूर भी किया जा सकता है।

एयरफ्लो तकनीक है मददगार

बच्चे अक्सर तब हकलाते हैं जब वो बिना सांस लिए एक बार में ज़्यादा शब्द बोलने की कोशिश करते हैं।

एयरफ्लो तकनीक में बच्चों को 3-4 शब्द बोलने के बाद सांस लेने के लिए कहा जाता है।

सांस लेने के बाद वे शब्दों को स्पष्ट और बिना अटके बोलते हैं।

बच्चों के लिए अधिकतर इसी तकनीक का उपयोग किया जाता है।

इसके साथ ही स्पीच ईज़ी टेक्नीक में बच्चों को धीरे-धीरे बात करना, शब्दों को दोहराना और देख-देख कर पढ़ना सिखाया जाता है जो उन्हें बिना रुके बोलने में मददगार साबित होता है।

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बड़ों के लिए टैपिंग टैक्नीक

हकलाहट या अटक कर बोलने की समस्या को उम्र बढ़ने के बाद भी दूर किया जा सकता है।

बड़ों में इस समस्या को दूर करने के लिए टैपिंग टैक्नीक का इस्तेमाल किया जाता है।

इसमें बोलते वक़्त हाथों को थपथपाया जाता है।

जैसे शब्दों की लय के साथ हाथों से पैर पर थपकी देना।

इससे हकलाहट को काफी हद तक दूर किया जाता है।

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Comments (1)

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