Solve Your Child's Sleep Problems

बचपन में अच्छी नींद न लो तो बड़े में सेहत पर असर

Solve Your Child’s Sleep Problems स्लीपिंग पैटर्न बचपन से बिगड़ने लगे तो उसके कई दुष्प्रभाव वयस्क होने पर भी दिखाई देते हैं. बच्चों और किशोरों में स्लीप डिसॉर्डर की शिकायत आम होती है।

ज्यादा भावुक हो जाना और एकाग्र क्षमता में कमी

  • भरपूर नींद न लेने की वजह से हिप्पोकैम्पस में खराबी आती है।
  • याददाश्त और नई जानकारी याद रखने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है।
  • बच्चों में आवेग आना, मूड बदलना जैसी समस्याएं भी होती है और अक्सर ही वे गुस्सा भी दिखाते हैं।
  • स्कूल में उनके साथियों और घर पर माता पिता के साथ उनके रिश्ते को प्रभावित करता है।
  • इस वजह से वे अतिसंवेदनशील हो सकते हैं जिससे उनके व्यवहार पर असर पड़ सकता है।
  • इनमें से कुछ पैटर्न्स पर विचार करके नींद की कमी वाले बच्चे का पता लगाना आसान है।
  • ज्यादा भावुक होने की वजह से उनकी भावनाओं को आसानी से कष्ट पहुंच जाता है।
  • धैर्य की कमी होना बहुत ज्यादा बोलना विद्रोही बर्ताव भी कर सकते हैं।

मोटापे का नींद की कमी से संबंध

ऐसा पाया गया है कि मोटापे से पीड़ित बच्चों का नींद की कमी से काफी गहरा संबंध है।

नींद की कमी के कारण वे काफी हड़बड़ाहट में और अनुचित रूप से खाते हैं जिस वजह से उनका बीएमआर घट जाता है।

बहुत ज्यादा देर तक जागने की वजह से उनके खाने की आदतें बिगड़ जाती है और खाने का समय भी जिससे वे ज्यादा खाने लगते हैं।

बाजार में उपलब्ध कई प्रकार के पैकेज्ड और फास्ट फूड्स में स्वाद बढ़ाने के लिए उनमें कई हानिकारक प्रिजर्वेटिव्स, कैफीन और शक्कर का उच्च स्तर होता है। जो उन्हें काफी देर तक जगाए रखती हैं, जिस वजह से मोटापा बढ़ता है।

दिल की बीमारी और डायबिटीज की आशंका

नींद की कमी से होने वाले मोटापे को हाई ब्लडप्रेशर, दिल की बीमारी, डायबिटीज, इनसोिम्नया (निद्राहीनता) और हादसे के प्रति संवेदनशील होने से भी जोड़ा जाता है।

इसकी वजह से सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और ज्ञानसंबंधी पहलुओं में विकास भी अवरूद्ध हो सकता है। इनमें से एकाग्रता के स्तर, खराब शैक्षणिक परफॉर्मेंस, आत्मविश्वास में कमी, निर्णय लेने की खराब क्षमता भी शामिल हैं।

इसकी वजह से मोटापा, दिन में नींद आना, ज्ञान संबंधी कार्याें में दिक्कत, सोने और खाने के पैटर्न, व्यवहारात्मक समस्याएं झुंझलाहट होना, खराब याददाश्त, थकान आदि दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

बच्चों में सोने की समस्याओं के संकेत दिखें तो बाल रोग विशेषज्ञ से मिलिए

  • खर्राटे लेना
  • नींद के दौरान सांस रुकना
  • सोने में दिक्कत होना
  • दिन में जागे रहने में दिक्कत
  • दिन के समय परफॉर्मेंस में स्पष्ट रूप से कमी आना
  • नींद के दौरान असामान्य वाकये जैसे कि नींद में चलना या बुरे सपने आना।

नींद को बेहतर करने के लिए कुछ सुझाव

  • सोने का नियमित समय बनाएं और इसे निश्चित ही रखिए।
  • जागने-सोने के समय से छ: घंटे पहले बच्चों को कैफीन वाला कोई भी सामान खाने या पीने के लिए न दें।
  • सोने के समय बच्चों को खाने के लिए ज्यादा कुछ न दें।
  • बेडरूम में तापमान सहज हो। बेडरूम में अंधेरा हो तथा घर में शोर कम हो।
  • डिनर के बाद के प्लेटाइम को आरामदायक समय बनाएं क्योंकि सोने के समय के आसपास बहुत ज्यादा गतिविधि भी उन्हें जगाकर रख सकती है।
  • सोने जाने के समय से एक घंटे पहले टीवी, रेडियो बंद कर देना दें और बच्चे के पास सुकूनभरी नींद बुलाएं
  • बच्चों के जागते रहने की आदत को बढ़ाए नहीं सुनिश्चित करें कि वे अपनी उम्र के अनुसार नींद लें।

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