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Sleep Disorders & Problems | नींद की कमी से होती है किडनी प्रभावित

Sleep Disorders & Problems

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Sleep Disorders & Problems अनिद्रा (नींद) की कमी, स्लीप एपनिया के अलावा अन्य विकारों का कारण बन सकती हैं।

अनिद्रा शरीर की बॉडी क्लॉक को असंतुलित करने का कारण हो सकती है।

जिससे शरीर का चयापचय (मेटाबॉलिज्म) बाधित हो सकता है।

नींद की कमी को पहले हाई ब्लड प्रेशर, तनाव, मोटापे, चिंता (एंग्जाइटी) आदि से जोड़कर देखा जाता था।

अच्छी नींद अगले दिन शरीर को फिर से ऊर्जा से भर देती है। और नींद का बार-बार टूटना इस ऊर्जा को बाधित करता है।

इनसोमनिया या स्लीप एपनिया की वजह से कई लोग हाइपरटेंशन और डायबिटीज़ से ग्रसित हो जाते हैं।

अनिद्रा कैसे किडनी को डैमेज करती है?
नींद की कमी का अर्थ है शरीर की खराब बॉडी क्लॉक जिससे शरीर की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है।

स्वस्थ जीवनशैली न अपनाने से बीमारियां होना स्वाभाविक है।

नींद पूरी न होने से नशे का प्रयोग भी बढ़ जाता है। जो शरीर के अंगों पर प्रभाव डालता है।

जिनमें किडनी भी शामिल है। यह एक चक्र है, जिसका सिरा पकड़ना आसान नहीं।

अस्वस्थ जीवनशैली से मिली बीमारियां, नींद को प्रभावित करती हैं।

नींद लाने के लिए ड्रग्स, शराब, दवाओं का उपयोग किया जाता है, जिनका किडनी पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

कुछ लोग नींद न आए तो नींद की गोलियां भी लेने लगते हैं, नींद की दवाओं के दुष्प्रभाव भी किडनी पर हो सकते है।

शरीर उन पर निर्भर हो जाए तो उनके बिना काम नहीं कर सकता है।

अक्सर लोग नींद के विकारों से अनजान होते हैं या इनकी अनदेखी करते हैं।

इस लापरवाही से नार्कोलेप्सी जैसे गंभीर स्लीप डिसऑर्डर जिसमें व्यक्ति कहीं भी कभी सो जाता है, की मुश्किल भी खड़ी हो सकती है।

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किडनी का काम नींद में बाधा डालता है

अनिद्रा और किडनी की बीमारी के बीच संबंध में यह स्पष्ट है कि शरीर में बढ़े हुए द्रव की उपस्थिति स्लीप एपनिया में योगदान कर सकती है, जिससे लोगों को रात में कई बार जागना पड़ सकता है।

यूरिक एसिड जैसे चयापचयी अपशिष्टों का धीरे-धीरे निर्माण लोगों को असुविधाजनक बनाता है, जो रात को नींद को बाधित करने में भी योगदान देता है।

न्यूरोलॉजिकल पर्सपेक्टिव से भी बात करें तो, गंभीर पुरानी बीमारी और इस बीमारी के लिए चिकित्सा, देखभाल की चिंता और तनाव भी नींद न आने का एक कारण हो सकता है।

अनिद्रा के व्यवहारिक दुष्प्रभाव
भूलना : अनिद्रा का व्यक्ति पर गंभीर दुष्प्रभाव होने लगता है। वह चीजों को भूलने लगता है।

एकाग्रता में कमी : वह चीजों पर कम ध्यान देता है नतीजतन क्रोध और चिड़चिड़ापन अचानक बढ़ जाता है।

कार्यक्षमता कम होना : व्यक्ति की कार्यक्षमता घटने लगती है और अलगाव के साथ डिप्रेशन को टालना संभव नहीं होता है।

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उपचार के लिए अपनाएं ये तरीके

* अनिद्रा से निपटने का एक तरीका यह है कि सोने जाने से 30 मिनट पहले स्नान करें, साथ ही एक गिलास गर्म दूध पिएं।

* कमरे में शोर और प्रकाश न्यूनतम होना चाहिए।

* अधलेटी या पसरी अवस्था में काम न करें। सीधे व सजग बैठकर काम करने से शरीर एक सीमा के बाद थक जाएगा और फिर नींद अच्छी आएगी।

* किसी विशेष समय के बाद अपने वर्क ईमेल को न देखें।

* हम अपने काम में अपने आप को ज़रूरत से ज्यादा लिप्त कर लेते हैं और शरीर देर तक जागने की आदत डाल लेता है।

* म्यूजिक थैरेपी लेने से भी दिमाग़ शांत होता है, जो अच्छी नींद में सहायक है।

अपनी नींद से समझौता न करें
वयस्कों से लेकर बच्चों तक नींद के घंटे तय होते हैं।

नींद का अभाव, शरीर को थका हुआ और उर्जा रहित बना देता है।

अनिद्रा एक तिहाई से अधिक वयस्कों को प्रभावित करती है।

लाखों लोगों में एडीएचडी या अवसाद या चयापचय रोग (मेटाबॉलिक डिसॉर्डर) या दिल की बीमारी का ख़तरा इस वजह से बढ़ जाता है।

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