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क्या रोक रहा है आपको रोज़ाना जिम जाने से?

आरामदायक जीवनशैली से निकाल कर खुद को व्यायाम करने के लिए प्रेरित करना एक बेहद मुश्किल कार्य है।

बिस्तर को त्याग कर व्यायामशाला में घंटों बीताना हर किसी के बस की बात नहीं है। इस सब के लिए दृढ़ निश्चय और प्रेरणा की आवश्यकता होती है।

तंदरुस्त शरीर की कामना तो हर कोई करता है परन्तु इसके लिए मेहनत हर कोई नहीं कर पाता। अगर आप भी उनमें से एक हैं जो हर सुबह जिम जाने का अलार्म बंद करके बिस्तर में घुस कर सो जाते हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए बेहद लाभदायक हो सकता है।

आखिर क्या रोकता है आपको रोज़ाना जिम जाने से?

सृजनशीलता की कमी

रोज़ाना एक ही तरह का व्यायाम करने से कई बार हम बेहद बोर हो जाते हैं। एक ही अनुसूची के मुताबिक चलते हुए हमारा मन उससे उब जाता है।

इसलिए खुद को व्यायाम के प्रति आकर्षित रखने के लिए हमें नए तरिकें सोचने चाहिए। कई बार अपने शड्यूल में हल्के से बदलाव से हमारा मन खुश हो जाता है और हम कार्य को बेहतर तरीके से पूरा कर पाते हैं। इसलिए एक छोटा सा बदलाव, आगे बढ़ते रहने का अच्छा उपाय है।

प्रेरणा की कमी

किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक ख़तम करने के लिए दृढ़ निश्चय होना बेहद आवश्यक है। अगर हम स्वस्थ और तंदरुस्त रहना चाहते हैं तो उसके लिए भी धैर्य और परिश्रम की ज़रूरत होती है।

स्वयं को प्रोत्साहित करने के लिए हमें किसी प्रेरणा की आवश्यकता होती है। किसी तंदरुस्त व्यक्ति को अपना आराध्य मान कर हम उसे अपना प्रेरणास्त्रोत बना सकते हैं। इससे हमारा दृढ़ निश्चय और भी मज़बूत हो जाता है।

लक्ष्य की कमी

किसी भी कार्य को शुरू करते हुए ही हमें अपना लक्ष्य तय कर लेना चाहिए। लक्ष्य ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

लक्ष्य तय करने से हमें आत्म विश्लेषण में भी सहायता होती है। हम अपने परिश्रम के परिणाम को देख कर प्रेरित हो सकते हैं।

साथी की कमी

एक और एक मिल कर ग्यारह हो जाता है यानी कोई भी कार्य अगर दो लोग मिल कर करें तो उसका परिणाम बेहतर निकल कर आता है।

इसी तरह व्यायामशाला जाने के लिए अगर आप भी कोई साथी ढूंढ लें तो आप एक दूसरे को प्रेरणा दे सकते हैं। कभी एक डग्मगाए, तो दूसरा उसे समझा सकता है। इस तरह आपका मन भी लगा रहेगा और आपका शेड्यूल भी खराब नहीं होगा।

उचित वातावरण की कमी

व्यायाम करने के लिए हमेशा एक खुली जगह की खोज करें। बंद कमरे कई बार हमें उचित वातावरण नहीं प्रदान कर पाते।

इसलिए ताज़ी हवा और खुले मैदान के नीचे व्यायाम करने से हमारे तन और मन दोनों को ही सुकून प्राप्त होता है और हमें अधिक थकान भी महसूस नहीं होती। व्यायामशाला चुनते हुए वहां के वातावरण को ध्यान से जांचना भी उतना ही आवश्यक है।

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