Health Topics In Hindi

शरीर में एसिड बढ़ने से कैसे रोक सकते हैं।pH level Balance tips hindi

pH level Balance tips hindi

2,470 total views, 2 views today

शरीर का सामान्य पीएच 7 से थोड़ा अधिक होना चाहिए, लेकिन एसिड के संतुलन को बनाए रखकर कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकते हैं।

जीवन को अस्त-व्यस्त होने से बचाने के लिए हर किसी को अपनी दिनचर्या में संतुलन बनाना जरूरी होता है

स्वस्थ जीवन और स्वस्थ शरीर के लिए संतुलन बनाए रखने होते हैं जैसे ब्लड प्रेशर, ऑस्मॉसिस, पानी, और मिनरल्स का संतुलन।

एक और महत्त्व संतुलन है एसिड और बेस अल्कली का संतुलन। एसिड-अल्कली का संतुलन शरीर में बेहद ज़रूरी है।

हमारे शरीर का सामान्य पीएच 7 से थोड़ा अधिक होना चाहिए अर्थात् थोड़े से अल्कलाइन वातावरण में हमारे सेल्स स्वस्थ रहकर अपना काम सही ढंग से करते हैं।

लेकिन आजकल हम सभी के शरीर में एसिड बढ़ता जा रहा है। एसिड की बढ़ी हुई इस अवस्था को मेटाबॉलिक एसिडोसिस कहते हैं।

कोशिकाओं के आसपास बढ़ते इस एसिड के कारण वह कैंसर सेल्स में बदल सकती हैं।

ब्लड में जब एसिड की मात्रा बढ़ती है तो ये कई तरह के ब्लॉकेज उत्पन्न करता है जो कि लकवा,वेरीकोस वेन्स और  हार्ट अटैक जैसी समस्याएं उत्पन्न करते है।

बढ़े हुए एसिड को नियंत्रित करके इन समस्याओं से बचा जा सकता हैं।

एसिड बढ़ने के प्रमुख कारण

वातावरण में ऑक्सीजन की कमी और कार्बन डाइ ऑक्साइड का स्तर बढ़ना क्योंकि सांस लेने पर यह बढ़ी हुई कार्बन डाइ ऑक्साइड रक्त के पीएच को कम कर देती है।

शरीर से एसिड के उत्सर्जन का कार्य मुख्य रूप से फेफड़ों और किडनी का है, यदि यह दो अंग ठीक से काम नहीं करते हैं तो भी शरीर में एसिड का स्तर बढ़ जाता है। अत: मेटाबॉलिक एसिडोसिस के उपचार के समय इन दोनो अंगों का खास ख्याल रखना चाहिए।

भोजन में सब्ज़ियों, फ्रूट्स और मेवों की कमी और इसकी जगह नॉनवेज, शुगर, अल्कोहल, चाय, कॉफ़ी, रिफाइंड तेल और आटे का ज्यादा प्रयोग  यह सभी मिलकर शरीर में एसिड की बढ़ोतरी करते हैं और इसी वजह कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

How Much Water do we Need | तय करें पानी की मात्रा

मेटाबॉलिक एसिड से होने वाली समस्याएं

हाई ब्लड प्रेशर

एसिड अधिक होने से अल्कलाइन मेटल्स जैसे पोटैशियम और मैग्नीशियम का स्तर खून में कम होना ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है।

किडनी स्टोन

एसिडिक वातावरण किडनी में स्टोन का निर्माण करता है, क्योंकि बढ़े हुए एसिड को कम करने के लिए उसे हड्डियों से कैल्शियम निकालना पड़ता है और यह कैल्शियम किडनी में जाकर जमा हो जाता है और पथरी या स्टोन्स बनाता है।

ऑस्टियोपोरोसिस

हड्डियों से कैल्शियम के निकलने से वे कमज़ोर हो जाती हैं और यह ऑस्टियोपोरोसिस नामक रोग उत्पन्न करती हैं।

जल्दी बुढ़ापा आना

एसिड बढ़ने से सेल्स जल्दी-जल्दी मरने लगते हैं, इसलिए बुढ़ापा शीघ्र आ जाता है।

बाल जल्दी सफेद होने लगते हैं, झुर्रियां आने लगती हैं, इम्युनिटी कम होने लगती है और थकान भी जल्दी होने लगती है।

दांत और मसूड़ों की समस्या

एसिड दांत , मसूड़ों की तकलीफ भी बढ़ाते हैं, जिससे वे जल्दी खराब होने लगते हैं।

दिमाग की क्रियाविधि प्रभावित होना

एसिड बढ़ने से आरबीसीएस की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता में कमी आ जाती है।

कम ऑक्सीजन मिलने से दिमाग अपने कार्यों को करने में दिन प्रतिदिन कमजोर होता चला जाता है।

पीएच का सही संतुलन है या नहीं

केमिकल शॉप या ऑनलाइन मिलने वाले हैड्रॉन पीएच पेपर का प्रयोग कर सकते हैं।

उसे लेकर यूरिन या लार के द्वारा उसमे दिए कलर इंडिकेटर से शरीर में हो रहे बदलाव का आसानी से पता लगा सकते हैं।

इसके लिए उसे कुछ सेकंड के लिए सुबह की दूसरे, यूरिन सैम्पल को प्लास्टिक के कप में लेकर उसमें पीएच पेपर डुबाकर निकाल लें।

जब पेपर सूख जाए तो उसके साथ दिए गए कलर चार्ट से मिलान करके पता कर लें कि यूरिन एसिडिक है या कि फिर अल्कलाइन (क्षारीय)।

लार के द्वारा टेस्ट भी सुबह की लार के द्वारा ऐसे ही किया जा सकता है। यूरिन और लार का सामान्य पीएच 7 होता है।

Tips to Stay Healthy in Hindi | स्वस्थ रहने कीअच्छी आदतें

एसिडिक पीएच को कैसे सही किया जाए

अगर रोज़ाना कुछ दिनों तक इनमें से कोई एक करें जैसे लौकी का जूस पिएं।

पुदीने की चटनी बनाकर या उसका रस निकालकर पिएं।

तुलसी की पत्तियों को कुछ दिन खाएं तो बढ़ा हुआ एसिड शांत हो जाएगा और शरीर फिर से स्वस्थ हो जाएगा।

रिस्क

किसी व्यक्ति के शरीर में एसिड या अम्ल की मात्रा बढ़ जाने पर और उसका पीएच स्तर 7.35 से नीचे होने को एसिडोसिस रोग कहते है।

मेटाबॉलिक एसिडोसिस में किडनी विकार के कारण शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है।

एसिडोसिस विकार होने का जोखिम कई बातों पर निर्भर करता है जैसे अधिक वसा वाला आहार जिसमें कार्बोहाइड्रेट्स की कमी हो, किडनी में विकार, मोटापा, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), एस्पिरिन या मिथेनॉल पॉइज़निंग और डायबिटीज।

मेटाबॉलिक एसिडोसिस क्या होता है

रक्त में पीएच और कुछ सामग्री के रूप में शरीर में एसिड असंतुलन मेटाबॉलिज्म एसिडोसिस कहलाता है।

यह सभी प्रकार के रोगों में सबसे सामान्य माना जाता है।

मेटाबॉलिक एसिडोसिस गुर्दों (किडनी) में होने वाली समस्या है।

यह तब होता है, जब किडनी पर्याप्त मात्रा में शरीर से अम्ल नहीं निकाल पाती।

या फिर संतुलन बनाए रखने वाले क्षारीय तत्वों को अधिक मात्रा में निकाल देती हैं।

मेटाबॉलिक एसिडोसिस के प्रकार

डायबिटीक एसिडोसिस

डायबिटीज के मरीजों में इंसुलिन के बढ़ने से जब शरीर में कीटोन्स का निर्माण होने लगता है, जो कि थोड़े एसिडिक होते हैं।

इससे एसिडिटी भी बढ़ती है। इसे डायबिटीज केटोएसिडाइसिस भी कहते हैं।

लैक्टिक एसिडोसिस

लैक्टिक एसिड की अधिकता से लैक्टिक एसिडोसिस होने की आशंका बढ़ जाती है।

यह रोग बहुत से कारणों हो सकता है जैसे अल्कोहल लेने, दिल का दौरा, कैंसर, लिवर संबंधी रोग, लो ब्लड शुगर आदि।

लंबे समय तक व्यायाम से भी शरीर में लैक्टिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है।

हाइपरक्लोरेमिक एसिडोसिस

सोडियम बाईकार्बोनेट की कमी से हाइपरक्लोरेमिक एसिडोसिस हो जाता है।

यह क्षार रक्त के पीएच को सामान्य रखने में सहायक होता है। अधिक दस्त या उल्टी होने से यह समस्या आ सकती है।

खाने में इन बातों का ध्यान रखें

अल्कोहल और कॉफी से दूर रहिए। फलों का प्राकृतिक रस पीजिए।

पास्ता, व्हाइट ब्रेड और एनिमल फैट लेने से बचिए।

कभी-कभी एसिडोसिस को बढ़ने से रोकने के लिए चावल का काढ़ा पीते हैं, जो शरीर से जहरीले स्लैग और अन्य हानिकारक पदार्थ निकालता है।

Fungal Infection Treatment in Hindi, Best Health Tips in Hindi, Bladder infection in Hindi,

Comment here