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क्या है रात में खाना खाने की प्रॉब्लम और इसके कारण?

क्या आप भी दिनभर अपने आहार का भरपूर ध्यान रखते हैं और रात होते ही पल भर में सब भूल जाते हैं?

अगर आप भी रात्रि भोजन के समय अधिक खाना खाते हैं या नींद से उठ कर आपको जोरों से भूख लगती है तो इस चीज को नज़रअंदाज़ मत करें, हो सकता है कि आप भी नाइट ईटिंग सिंड्रोम के शिकार हो।

परिभाषा

अगर आप इस बीमारी का शिकार हैं या आपका कोई करीबी व्यक्ति इस बीमारी से जूझ रहा है तो ऐसे कई लक्षण हैं जिन्हें पहचान कर आप इस बीमारी का पता लगा सकते हैं। यदि आपको सुबह उठकर रसोई घर में रात का पड़ा हुआ भोजन गायब मिले, तो जाहिर सी बात है कि घर के ही किसी मनुष्य ने रात में उठ कर उसे ग्रहण कर लिया है। इसलिए हो सकता है कि आपके घर में भी कोई नाइट इटिंग सिंड्रोम का शिकार हो।

अक्सर ऐसे लोगों को लगता है कि इस तरह भोजन ग्रहण करने से उन्हें चैन की नींद प्राप्त हो जाएगी। सुबह उठते ही वह अपने किए पर शर्मिंदा महसूस करते हैं और नाश्ता सही तरीके से नहीं कर पाते। रात को भूख मिटाने के बाद उन्हें सुबह नाश्ते के टेबल पर भूख नहीं लगती।

निदान

डीएसएम के पांचवें एडिशन के अनुसार नाइट इटिंग सिंड्रोम को अदर स्पेसीफाइड फीडिंग और ईटिंग डिसऑर्डर में वर्गीकृत किया जाता है।

NES के मानदंड के अनुसार नींद से उठ कर भोजन करना, शाम के बाद अधिक आहार लेना और इस तरह की आदत से परेशान होना आदि इस बीमारी के शुरुवाती चिन्ह हैं।

अन्य मानदंड के अनुसार लगातार तीन महीने तक शाम में अधिक भोजन लेना व हफ़्ते में दो बार रात को उठकर भोजन करना आदि इस बीमारी का संदेश देते हैं।

ठूस ठूस कर खाना या कम समय में अधिक खाना भी इस बीमारी की तरफ इशारे करते हैं। अक्सर पीड़ित व्यक्ति इस पर नियंत्रण नहीं रख पाता।

जैव- चक्रीय आवर्तन की सहायता से हमारा शरीर रोशनी और अंधेरे के आधार पर नींद और भूख को क्रम में रखता है। परंतु नाइट इटिंग सिंड्रोम वाले लोगों को इन कार्यों को नियमित रूप से करने में मुश्किल होती है।

साधारण मनुष्य को सिर्फ नींद से उठकर, होश में ही भूख लगती है परन्तु इन लोगों को नींद में भी भूख महसूस होती है जिस वजह से देर रात में इनकी नींद खुल जाती है और उन्हें भोजन ग्रहण करने की इच्छा होती है।

कई अध्ययनों के अनुसार साधारण मनुष्य रात के 8 बजे से सुबह के 6:00 बजे तक केवल 15% उष्मांक ग्रहण करता है परंतु नाइट इटिंग सिंड्रोम वाले लोग इस समय सीमा के बीच कुल 56 प्रतिशत उष्मांक ग्रहण करते हैं।

कारण

हार्मोनल असंतुलन को भी इसका एक कारण बताया जाता है। अधिकतर कॉलेज के बच्चों को देर रात तक जागने की आदत हो जाती है जिस वजह से वह देर रात में भोजन करते हैं। कई बार यह आदत इतनी बुरी तरह लग जाती है कि इसे छोड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई लोग अक्सर वजन घटाने के लिए दिन में पर्याप्त भोजन ग्रहण नहीं करते जिस वजह से शरीर बहुत कमजोर महसूस करने लग जाता है, वह अपने कार्य करने में असमर्थ हो जाता है। ऐसे में लोगों को रात में उठकर भोजन लेना पड़ता है और धीरे-धीरे यह एक आदत ही बन जाती है।

व्यवहार उपचार

संज्ञानात्मक व्यवहारपरक चिकित्सा से कई लोगों को सहायता प्राप्त हुई है। इससे पीड़ित लोगों को इसके बारे में ज्ञान देकर हम उनकी सहायता कर सकते हैं। इस बीमारी को पहचानना और समझना इसके उपचार की तरफ पहला कदम है। इस बीमारी पर काबू पाने के लिए दिन में पर्याप्त भोजन ग्रहण करना चाहिए और परहेज़ को हटाना चाहिए। रात में भूख मिटाने के बाद अक्सर नाश्ता करना मुश्किल हो जाता है परन्तु कुछ दिन ज़बरदस्ती इस आदत को अपनाने से धीरे- धीरे यह दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है।

अक्सर नाइट इटिंग सिंड्रोम वाले लोग यह समझते हैं कि रात में उठकर अधिक भोजन खाने से ही उन्हें अच्छी नींद आएगी, उनकी इस सोच को दूर करना बेहद महत्वपूर्ण है।

इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए स्वयं पर नियंत्रण रखना बेहद ज़रूरी है। हमें हर कदम पर अपने हर कार्य को जाँचना चाहिए। जो कारण हमें इस आदत की तरफ ढकेलते हैं, उन्हें पहचाना ज़रूरी है। सभी कार्यों को दिमाग में सोच कर समझना चाहिए कि कहां हम खुद को रोक सकते थे। इस तरह अगली बार उस स्थिति में हम स्वयं पर बेहतर नियंत्रण रख पाएंगे।

हमें एक कागज़ पर उन सभी कारणों की सूची बना कर रखनी चाहिए जिनकी वजह से हमें इस बीमारी से छुटकारा पाना है। सोने से पहले इन्हें पढ़ कर हम खुद को प्रेरणा दे सकते हैं।

वास्तविक बाधाओं से भी कई लोगों की मदद की जा सकती है जैसे कि रसोई में जाने के रास्ते को रात में बन्द करदेना। कुछ अच्छी आदतें जैसे कि सुबह समय से उठना व रात को समय से सोना आदि लाभदायक साबित होती हैं।

अन्य इलाज

फोटोथरेपी यानिंकी प्रकाश चिकित्सा के प्रयोग से भी बेहतर परिणाम देखे गए हैं। चमकदार रोशनी से शरीर में मेलाटोनिन पर प्रभाव पड़ता है जो कि जैव- चक्रीय आवर्तन को विनियमित रखने का कार्य करता है।

मनोरोग चिकित्सा से भी कई लोगों को लाभ प्राप्त हुआ है।

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