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Keep Your Muscular System Healthy | मांसपेशियों को कैसे रखें स्वस्थ

How To Keep Your Muscular System Healthy

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How To Keep Your Muscular System Healthy मांसपेशियों में दर्द, खिंचाव, अकड़न की शिक़ायत तनाव के कारण या मामूली चोट या बहुत ज़्यादा काम या आरामदायक जीवनशैली की वजह से अब किसी भी उम्र के लोगों में दिखाई देने लगी है। जानिए इससे होने वाली समस्याएं और बचाव के तरीके।

मांसपेशियां हमारे शरीर की एक महत्वपूर्ण संरचना होती हैं। उनके बिना न तो हम खड़े हो सकते हैं न सीधे बैठ सकते हैं, इसलिए बहुत जरूरी है कि उनकी उचित देखभाल की जाए।

लेकिन भागदौड़-भरी ज़िंदगी में हम अपने शरीर का पूरा ख्याल नहीं रखते, इससे हमारी मांसपेशियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

फास्ट फूड का सेवन, देर रात तक जागना, पूरी नींद न लेना, एक्सरसाइज़ न करना या अतिसक्रिय जीवन जीना मांसपेशियों के लचीलेपन में कमी में अहम भूमिका निभाते हैं।

मांसपेशियों की अकड़न के कारण हमारे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

अकड़न के संभावित कारण:मांसपेशियों में अकड़न तब होती है जब ये कड़ी हो जाती हैं और उन्हें मूव करना कठिन होता है, विशेषरूप से आराम करने के बाद। इसके कारण दर्द, ऐंठन और बैचेनी हो सकती है।

मांसपेशियों की अकड़न के कई कारण हैं। गंभीर बीमारियों से लेकर खानपान की गलत आदतें और अनियमित जीवनशैली इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मैग्नीशियम और कैल्शियम का असंतुलन:- मांसपेशियों को रिलैक्स होने के लिए मैग्नीशियम की आवश्यकता पड़ती है और संकुचन के लिए कैल्शियम की, जब दोनों असंतुलित हो जाते हैं, तो इसके कारण मांसपेशियां कड़ी हो जाती हैं और उनमें खिंचाव आने लगता है।

मांसपेशियों की मस्तिष्क से संवाद क्षमता को प्रभावित करता है डिहाइड्रेशन:- पानी हमारी मांसपेशियों की संरचना का एक महत्वपूर्ण भाग है। इससे मांसपेशियों में लचीलापन बना रहता है।

पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं। ये आदेशों को हमारे तंत्रिका तंत्र से मांसपेशियों को भेजते हैं और फिर मांसपेशियों से तंत्रिका तंत्र को।

बिना पर्याप्त पानी के मांसपेशियों की मस्तिष्क से संवाद करने की क्षमता सीधे प्रभावित होती है।

निष्क्रियता, आरामदायक जीवनशैली:- शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना, लंबे समय तक बैठे, खड़े या लेटे रहने से भी मांसपेशियां कड़ी हो जाती हैं।

तनाव से मांसपेशियां होती हैं कड़ी :- तनावपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए हमारा शरीर कड़ा हो जाता है।

लंबे समय तक तनावग्रस्त रहने से मांसपेशियां कड़ी हो जाती हैं।

 वार्मअप और कूलडाउन न करना:- जब आप शरीर को सीधे रेस्टिंग फेज़ से एक्टिव फेज़ में ले आते हैं तो मांसपेशियों में टूट-फूट हो जाती है, जिससे उनमें दर्द होता है और वो कड़ी हो जाती हैं। इसलिए वर्क आउट करने से पहले वार्म-अप और वर्क-आउट के बाद कूल डाउन जरूर करें।

अन्य कारण

  • अत्यधिक वर्कआउट
  • कड़ा शारीरिक श्रम
  • चोट लग जाना
  • अर्थराइटिस
  • एंगज़ाइटी डिसऑर्डर
  • संक्रमण और ऑटो-इम्यून रोग के कारण सूजन आ जाना
  • दवाइयों के साइड इफेक्ट्स
  • पोषक भोजन की कमी
  • वज़न अधिक होना
  • नींद पूरी न होना
  • ठंडे और आर्द्र वातावरण में रहना।

मांसपेशियों की अकड़न से होने वाली समस्याएं

मांसपेशियां हमारे शरीर की सबसे महत्वपूर्ण संरचनाओं में से एक हैं।

शरीर की हर गतिविधि के लिए इनकी आवश्यकता पड़ती है।

इन गतिविधियों को करने के लिए मांसपेशियों का लचीला होना बहुत ज़रूरी है।

मांसपेशियां कड़ी हो जाएं हैं तो कई समस्याएं आती हैं।

ये समस्याएं हैं

  • शरीर की गति करने की क्षमता प्रभावित होती है
  • अंगों को हिलाने-डुलाने में समस्या आना
  • मांसपेशियों में दर्द
  • अत्यधिक थकान होना
  • पूरे शरीर या किसी विशेष भाग में दर्द होना
  • मसल्स नॉट (मांसपेशियों में गठानें बन जाना)
  • मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होना
  • अपने सामान्य कार्य करने में परेशानी आना।

मांसपेशियों की अकड़न से बचने के टिप्स

संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करें जिसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में हों।

दिन में तीन बार मेगा मील यानी खाने की बजाय छह बार खाएं, ताकि मांसपेशियों में उर्जा का स्तर बना रहे।

30 मिनट एक्सरसाइज से होंगी मांसपेशियां रिलैक्स

रोज़ आधे घंटे योग व एक्सरसाइज करें। एक्सरसाइज़ से मांसपेशियां रिलैक्स रहती हैं।

मानसिक स्थिति में भी सुधार आता है, तनाव कम होता है। लेकिन अधिक न करें, क्योंकि इससे मांसपेशियां कड़ी हो जाएंगी।

रिलैक्सेशन और मेडिटेशन

खुद को शांत रखें। अपने जीवन में तनाव के स्तर को कम करें, तनावग्रस्त रहने से मांसपेशियों में कड़ापन आ जाता है।

मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए ध्यान करना चाहिए।

सुबह स्ट्रेचिंग से मांसपेशियां रहेंगी पूरे दिन के लिए तैयार
जब सोकर उठें, तो अपनी मांसपेशियों को स्ट्रेच करें।

इससे पूरे शरीर में रक्त का संचरण बढ़ जाएगा, और दिन भर की गतिविधियों के लिए मांसपेशियां तैयार हो जाएंगी।

अपना शरीर विन्यास ठीक रखें

अपनी शारीरिक मुद्रा यानी पॉश्चर दुरूस्त रखें।

गलत पॉश्चर के कारण मांसपेशियों में टूट-फूट की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है।

शरीर में पानी की कमी न होने दें

हमारी मांसपेशियां सक्रिय ऊत्तक होती हैं, जिन्हें पानी की काफी मात्रा में आवश्यकता होती है।

रोज 8-10 गिलास पानी पिएं।

पर्याप्त नींद बढ़ाती है लचीलापन

मांसपेशियों के सुधार का काम नींद में ही पूरा होता है।

नींद की कमी से शरीर में तनाव बढ़ता है, जिससे मांसपेशियों का लचीलापन कम होता है।

घरेलू उपाय हैं कारगर 

  • जब तक मांसपेशियां रिपेयर न हो जाएं, आराम करें
  • हॉट या आइस पैक का इस्तेमाल करना चाहिए
  • रक्त संचरण बढ़ाने के लिए गर्म पानी से नहाना चाहिए
  • प्रभावित क्षेत्र पर मसाज करें
  • 2-4 टेबलस्पून बेकिंग सोडा गर्म पानी में डालें। इस पानी से नहाएं। इससे मांसपेशियों के दर्द में आराम मिलता है।

इस पोस्ट को भी पढें :- स्वस्थ जीवन के लिए 8 अच्छी आदतें

मांसपेशियों के लिए सूपर फूड्स

हमारा खानपान हमारी मांसपेशियों को स्वस्थ्य रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कुछ खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाने और उनका लचीलापन बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है।

सेब के एंटी ऑक्सीडेंट्स मांसपेशियों के लिए अच्छे

खाली पेट एक सेब खाएं। ये मृत कोशिकाओं को पुनर्जीवन देता है।

इसमें पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट्स मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे होते हैं।

तरबूज़ मांसपेशियों का कड़कपन दूर करता है

तरबूज़ में अमीनो एसिड एल-सिट्रुलिन होता है जो मांसपेशियों का कड़ापन दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अदरक सूजन कम करने में प्रभावी

मांसपेशियों में लचीलापन बनाए रखने के लिए अदरक को अपने भोजन में शामिल करें, क्योंकि संचरण तंत्र पर इसका स्टीम्युलेटिंग प्रभाव होता है। यह सूजन कम करने में भी बहुत उपयोगी है।

हल्दी लचीलापन बनाए रखती है

हल्दी सूजन कम करती है और रक्त का संचरण सुधारती है।

यह मांसपेशियों को रिपेयर करने में भी बहुत उपयोगी है और उनका लचीलापन बनाए रखती हैं।

डेयरी प्रोडक्ट्स बनाते हैं मांसपेशियों को मज़बूत

डेयरी प्रोडक्ट्स प्रोटीन और कैल्शियम के अच्छे स्त्रोत होते हैं जो मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसलिए दूध, दही को अपने नियमित आहार में शामिल करना चाहिए।

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