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कैसे करें अपने बच्चे की गलत तरीके से सोने की आदत को दूर

How to Correct Sleep Habit : बच्चों को सुलाना हर मां के लिए एक बेहद कठिन कार्य होता है। आज हम आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं जो अवश्य ही आपकी सहायता करेंगे।

अनुसूची नहीं, बल्कि लय का पालन कर

अक्सर बच्चों के सोने का समय निर्धारित नहीं होता। यह समय बदलता रहता है। कई बार वह देर रात में जाग जाते हैं तो कभी दिन भर सोए रहते हैं।

ऐसे में महिलाओं को बच्चों की अनुसूची का दबाव नहीं महसूस करना चाहिए। उन्हें समझना चाहिए कि बच्चों के मामले में अनुसूची का पालन करना बेहद कठिन हो सकता है। इसके बारे में सोचकर वह सिर्फ स्वयं की ही परेशानी को बढ़ाएंगी।

इसलिए अनुसूची के स्थान पर लय का पालन करना आसान और सही माना जाता है। बच्चों को उनकी जरूरत के हिसाब से चलाने की कोशिश करनी चाहिए।

जब वह नहीं सोना चाहते अगर आप तब 2 घंटे भी बर्बाद कर लेंगे तो भी उसका कोई लाभ नहीं होगा परंतु जब उन्हें असल में नींद आएगी तब सिर्फ दस मिनट का प्रयास भी बहुत होगा। इस तरह आप खुद को और बच्चे को दबाव से मुक्त कर सकती हैं।

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अपनी अंत: प्रज्ञा को नज़रअंदाज़ ना करें

आज कल मां बनते ही एक औरत को कई प्रकार के सुझावों और ज्ञान के बोझ के नीचे दबा दिया जाता है। हर कोई उसे अपनी सूझबूझ से ज्ञान दे कर चला जाता है।

ऐसे में एक मां अपना अस्तित्व खोने लगती है। वह भूल जाती है कि अपने बच्चे के बारे में उससे अधिक और कोई नहीं जानता। कहा जाता है कि अगर एक मां का मन कह रहा है कि कुछ गलत है तो अवश्य ही कुछ ना कुछ ज़रुर गलत होता है।

इसलिए हमारी सभी माँओं को सलाह है कि अपने बच्चे  के बारे में सभी फैसले वह अपने और अपने जीवनसाथी के सहज ज्ञान के आधार पर ही लें। मां बाप से अधिक ज्ञान और किसी किताब में नहीं मौजूद।

अन्य बच्चों से तुलना ना करें

मां बनने के पश्चात अक्सर हमें अन्य माओं के साथ समय बिताना अच्छा लगता है। उनके साथ मिलकर बच्चों की आदतों और देखभाल की बातें करने से हमारा दिल हल्का हो जाता है और हमें कई नए तरीकों के बारे में भी पता लगता है।

परंतु हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम अपने बच्चे की तुलना अन्य बच्चों से ना करें। कई बच्चें ऐसे भी होते हैं जिन्हें सुलाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती।

सिर्फ 10-15 मिनट में ही वह गहरी नींद में सो जाते हैं। परंतु कई बच्चों को सुलाना एक बेहद कठिन कार्य होता है। सुलाने के लिए 10 तरह के तरीके अपनाने पड़ते हैं।

यह होना साधारण बात है इसलिए कभी भी अपने बच्चे की कमियों को दूसरे बच्चों से मत तोलें। तुलना करने से हम स्वयं के लिए परेशानी का बीज बो देते हैं। हर बच्चा अलग है और उसके सोने का समय और तरीका भी अलग है, इस बात को समझ लेने में ही हमारी भलाई है।

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बच्चे की ज़रूरतों को समझें

आजकल हर मोड़ पर एक मां को यह बताया जाता है कि उसके बच्चे के लिए क्या सही है और क्या गलत। अक्सर रिश्तेदार और दोस्त हर मां को कई तरह के सुझाव देते रहते हैं।

बड़ी बुजुर्ग औरतें भी कई तरह की सलाह देती रहती हैं। इन सभी सुझावों को सुनना अच्छी बात है परंतु अपने बच्चे के लिए क्या बेहतर है यह सिर्फ एक मां ही जानती है।

कहा जाता है कि बच्चे को सुलाने के लिए रात को मां का दूध पिलाना, गोद में सहलाना या पालने में हिलाना आदि लाभदायक हो सकता है। यह सभी सुझाव बरसों से हर मां को दिए जाते हैं परंतु यह स्वभाविक बात है कि हर मां को ज्ञान हो जाता है कि उसके बच्चे के लिए कौन सा सुझाव लाभदायक हो सकता है।

क्या आप जानते हैं कि बच्चे को गोद में पकड़ कर एकदम से खड़े होने से बच्चे के दिल की धड़कन कम हो जाती है?

हर बच्चा अपनी मां को कुछ ऐसे संकेत देता रहता है जिससे मां को पता लग सके कि वह क्या चाहता है। अगर बच्चे को आपका उसे गोद में उठाना नहीं पसंद तो वह रो कर उसका विरोध प्रकट करते हैं।

इसलिए जब तक आपके बच्चे को आपके ध्यान और समय की जरूरत है तब तक उसे सुलाने के लिए कोई भी किया गया प्रयास व्यर्थ नहीं है।

अन्य माँओं के सामने अपने जज्बातों को ईमानदारी से व्यक्त करें

अक्सर कहीं माएं दिखावे के चलते लोगों के सामने सब कुछ सही होने का नाटक करती हैं। भले ही वह बच्चे से जुड़ी ज़िम्मेदारी या पति के साथ संबंध को लेकर चिंतित हों परंतु वह अन्य माँओं के सामने इस तरह ढोंग करती हैं कि जैसे उनका जीवन बेहद ही कुशल चल रहा हो।

अक्सर इस झूठ से हमारा और सामने वाले व्यक्ति का नुकसान होता है। इस तरह हम भी अपना दुख किसी के साथ सांझा नहीं कर पाते और अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं। हमारे झूठे दिखावे को देखकर अन्य माएँ भी चिंता में डूब सकती हैं।

ऐसे में वह स्वयं को और अपने जीवन को कोसने लग जाती हैं। वह सबसे अलग-अलग रहने लग जाती हैं। इसलिए सभी माँओं को आपस में मुकाबला करने की जगह एक दूसरे के साथ अपना दुख सांझा करना चाहिए।

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