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दिमाग में संक्रमण का खतरा पैदा कर सकता है बहते कान की अनदेखी

Home Remedies for Ear Infections

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Home Remedies for Ear Infections कान बहना एक आम समस्या है। किसी भी आयुवर्ग के लोग इससे पीड़ित हो सकते हैं। कान में संक्रमण, पर्दे में छेद या हड्डी में गलाव इसकी मुख्य वजह हो सकते हैं।

समस्या दो तरह से होती है

इसके मुख्यतः दो प्रकार होते हैं – पहली एक्यूट है जिसमें अचानक संक्रमण होता है।

दो हफ्ते से ज़्यादा समय होने पर यह अवस्था गंभीर कहलाती है।

दूसरी क्रॉनिक जो 15 से 20 फीसदी लोगो में होती है। इसे क्रॉनिक ओटाइटिस मीडिया कहते हैं।

ये वजह हो सकती हैं

नाक व गले का संक्रमण कान में पहुंच सकता है, यह ज़्यादातर वायरस या बैक्टीरिया जनित होता हैं।

ज़ुकाम रहने पर नाक व कान के मध्य स्थित यूस्टेशियन ट्यूब के उचित कार्य न करने की दशा में कान पर प्रतिकूल असर होने लगता है।

टॉन्सिल्स, बड़े हुए ऐडेनोइड्स, एलर्जी व साइनस की समस्या भी इसका कारण बनती है।

भीड़भाड़ वाली जगहों व गंदगी में रहने वाले कुपोषित लोगों में ज्यादा होता है।

कान में चोट लगने पर बाह्य संक्रमण भी हो सकता है।

इससे कई बार पर्दे में छेद हो जाता है जो कुछ लोगो में स्थायी रहने से कान बार-बार बहता है।

ये होती हैं समस्याएं

एक्यूट अवस्था में कान में अचानक दर्द होता हैं, भारीपन व कान सुन्न हो जाता है।

कई बार अचानक कान बहना शुरु हो जाता है जिसके बाद कान में दर्द से आराम मिलता है।

क्रॉनिक में कान कुछ समय के लिए या लगातार बहता है तथा सुनने की क्षमता कम होती जाती है।

कई लोगों में समस्या केवल पर्दे व सुनने की हड्डियों तक ही सीमित रहती है लेकिन कुछ में यह आसपास की संरचनाओ को प्रभावित कर सकती है।

क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं

जिन लोगों का कान लंबे समय तक बहता है उनमें हड्डी का गलाव पास स्थित कई महत्वपूर्ण संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है।

सुनाई कम देने के अलावा दिमाग़ में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

चेहरे की नस प्रभावित होने पर चेहरा टेढ़ा हो सकता है। चक्कर आ सकते हैं व कान के आसपास फोड़ा बन सकता है।

ठीक नहीं है रोज कान साफ करने की आदत

बचाव के तरीके
कान के बहने की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। ज़्यादातर कान के पर्दे व हड्डी के रोग लंबे समय तक ज़ुकाम रहने पर होते हैं।

इसलिए कान को ठीक रखने के लिए ज़रूरी है कि ज़ुकाम से बचें।

एलर्जी को नियंत्रण में रखे, उन्हें बढ़ने न दें। अपने आप कान में कोई द्रव्य जैसे गरम तेल आदि न डालें।

कान बहने या अन्य तकलीफ होने पर कान को सूखा रखें। इसमें पानी न जाने दें।

नहाते समय कान में तेल या वैसलीन से चिकनी की हुई रुई लगाई जा सकती है।

छोटे बच्चों को लिटाकर दूध न पिलाएं। उनका सिर थोडा ऊंचा रखें तथा दूध पिलाने के बाद पीठ थपथपायें।

खांसी-ज़ुकाम या गले के लिए बिना चिकित्सकीय परामर्श के किसी दवा का इस्तेमाल न करें।

ये कान को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

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