Giloy
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Giloy-गिलोय, Tinospora cordifolia के बारे में जानें

गिलोय (Giloy) को आयुर्वेद में अमृता नाम दिया गया है क्यूंकि यह अमृत के सामान उपयोगी होती है आचार्य चरक के अनुसार गिलोय वात दोष को हरने वाली सबसे श्रेष्ठ औषधि है।

गिलोय जिसका वैज्ञानिक नाम Tinospora cordifolia है। यह एक लता होती है। इसके पत्तों का आकर पान के पत्तों की तरह होता है। आयुर्वेद में गिलोय का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। इसे आयुर्वेद में अमृता नाम से जाना जाता है। ज्वर (Fever) के लिए गिलोय को सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है। और इसको जीवन्तिका नाम दिया गया है।

वैज्ञानिक वर्गीकरण

  • जगत – पादप (Plantae)
  • संघ- मैग्नोलियोफाइटा (Magnoliophyta)
  • जाति – टीनोस्पोरा (Tinospora)
  • प्रजाति – कार्डीफोलिया (cordifolia)
  • द्विपद नाम- टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया (Tinospora cordifolia) 

अलग-अलग भाषाओं में गिलोय के नाम

  • वैज्ञानिक नाम – Tinospora cordifolia
  • हिंदी – गिलोय
  • संस्कृत – अमृता, गुडुची, छिन्नरुहा, चक्रांगी
  • कन्नड़ – अमरदवल्ली
  • गुजराती – गालो
  • मराठी – गुलबेल
  • तेलुगू – गोधुची, तिप्प्तिगा
  • फारसी – गिलाई
  • तमिल – शिन्दिल्कोदी

गिलोय Giloy की लता सामान्यतः वनों, चट्टानों, खेतों की मेढ़ों, पर पायी जाती है। यह ज्यादातर पेड़ों के आस-पास पायी जाती है और उन्ही पेड़ों को यह अपना आधार भी बनाती है। जिस भी पेड़ में यह अपना आधार बनाती है। उसके गुण भी गिलोय में आ जाते है इसीलिए नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

भूरे रंग की यह लता ऊँगली के बराबर मोटी होती है। हालाँकि गिलोय की पुरानी लतायें ज्यादा मोटी भी हो सकती है। इसकी छाल बहुत पतली होती है। जिसे हटा देने पर भीतर का हरा भाग दिखाई देने लगता है। ग्रीष्म ऋतु गिलोय पर पीले रंग के फूल होते है। और इसके फल मटर के दाने के आकार के होते है। पकने के बाद फलों का रंग लाल हो जाता है। और इसका बीज मिर्च के बीज के समान होता है। गिलोय Giloy की लता का एक छोटा सा टुकड़ा मिट्टी में लगाने से भी यह उग जाती है।

गिलोय बहुत से रोगों का निवारण करने के लिए बहुत ही लाभप्रद है। आइये जानते है कि यह किन रोगों में गिलोय लाभकारी होती है।

गिलोय के औषधीय गुण

  • सोंठ और गिलोय का चूर्ण सूंघने से हिचकी दूर हो जाती है।
  • रक्त से सम्बंधित विकारों जैसे के खुजली,वातरक्त में भी गिलोय का उपयोग करने से इन विकारों में लाभ होता है।
  • सभी प्रकार के ज्वर (Fever) में गिलोय का काढ़ा बहुत लाभदायक होता है।
  • गुड़ के साथ गिलोय के चूर्ण का सेवन करने से कब्ज में आराम मिलता है।
  • गठिया में भी गिलोय का काढ़ा बहुत लाभदायक होता है।
  • कमजोर दृष्टि हो तो गिलोय का सेवन करें लाभ होगा।
  • पीलिया में गिलोय का सेवन बहुत ही लाभदायक है

पिछले कुछ लेखों में हमने आयुर्वेद से जुडी कई और चीज़ों के बारे में भी बताया है। जैसे एलोवेरा और आँवला या फिर आप आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के नाम के बारे में जानकारी चाहते है। अगर आपने अभी तक यह लेख नहीं पढ़ें है तो आप उन लेखों को बारे में भी अवश्य पढ़ें।

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