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फ़्लू सीज़न की हुई तेज़ी से शुरुवात

Flu Season: अब से कुछ एक महीने पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा यह ऐलान किया गया था कि इस वर्ष फ़्लू के लिए दी जाने वाली वैक्सीन उतनी प्रभावशाली नहीं होगी जितनी उम्मीद की जा रही थी।

इसका निर्माण 4 उपभेदों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा था परंतु यह दक्षिणी गोलार्द्ध में मौजूद इन्फ्लूएंजा ए (H3N2) और इन्फ्लूएंजा बी (विक्टोरिया) नाम के अपभेदों से मेल खाने में असफल रही।

पहले से ही यह संभावना की जा रही थी कि दक्षिणी गोलार्द्ध में फैले जाने वाले यह उपभेद यूएस में भी ज़रुर नुकसान पहुंचाएंगे और ऐसा ही हुआ।

यह उपभेद अब यूएस के लुसियाना, अलबामा, जॉर्जिया, मिसिसिपी, साउथ कैरोलिना, टेक्सास और प्यूर्टो रिको इलाकों में फेल गया है।

15 नवंबर को रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र द्वारा जारी की गई साप्ताहिक फ़्लू रिपोर्ट के अनुसार अभी तक 3 बच्चों की इस रोग से मृत्यु हो गई है।

आंकड़ों के अनुसार एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के पास आने वाले 2.3% मरीज़ केवल इन्फ्लूएंजा से ही पीड़ित हैं, जो की 2.4% के राष्ट्रीय आधार दर से नीचे है।

इसके अतिरिक्त मृतकों कि संख्या में भी 4.9% इन्फ्लूएंजा और न्यूमोनिया के मरीज़ शामिल थे। यह संख्या 6 प्रतिशत की महामारी सीमा से कम है।

सीडीसी के प्रवक्ता क्रिस्टेन नॉर्डलंड ने हैल्थ लाइन से बात करते हुए कहा कि आज की निगरानी रिपोर्ट के अनुसार H1N1, H3N2 और इन्फ्लूएंजाफ्लू वायरस के फैलने से फ़्लू कि गतिविधियाँ देश भर में तेज़ी से बढ़ती हुई नज़र आ रही हैं।

देश के कई कोनों और कई आयु वर्गों में यह अत्यधिक प्रभावी है । कई स्थानों पर यह फ़्लू इस वर्ष समय से पूर्ण ही फैलता नज़र आ रहा है, तो कई जगह अभी तक इसका आगमन नहीं हुआ है।

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वर्तमान स्थिति

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार फ़्लू की गतिविधियों पर  फिलहाल कोई भी भविष्यवाणी करना बहुत जल्दी होगा।

येल यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोगों के निपुण डॉ रिचर्ड मर्टिनेलो ने कहा कि इस वर्ष फ़्लू सामान्य से अधिक या कम होगा इस पर अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। परंतु यह बात तो स्पष्ट है कि सामान्य तौर पर मौजूद होते हुए भी इस रोग के गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं।

प्रत्येक वर्ष यह फ़्लू फरवरी के महीने के पास पाया जाता है। परन्तु अभी से ही कई स्थानों पर इसकी गतिविधियाँ शुरू हो गई हैं।

वर्तमान में इन तीन निम्नलिखित उपभेदों की गतिविधियाँ देखी गई हैं :

  • ए (H3N2)
  • बी / विक्टोरिया
  • H1N1

संक्रामक रोगों के माहिर और जॉन हॉपकिंस सेंटर फॉर हेल्थ सिक्योरिटी के वरिष्ठ विद्वान डॉ अमेश अदलजा का कहना है कि यह सभी उपभेद एक ही तरह के लक्षण पैदा करते हैं जैसे कि – तेज़ बुखार, कंपकंपी, खांसी और बदन दर्द।

अदलजा ने कहा कि इन्फ्लूएंजा बी, फ़्लू का एक ऐसा उपभेद है जो कि ना केवल सामान्य लक्षण पैदा करता है बल्कि गंभीर बीमारी भी पैदा कर सकता है।

हालांकि ज़रूरी नहीं है कि जो उपभेद अभी अधिक संख्या में फेल रहे हैं वहीं पूरा वर्ष देखने को मिलेंगे। इस बीमारी और इसके उपभेदों में कई परिवर्तन देखने को मिलते हैं।

पिछले वर्ष का हाल

पिछले वर्ष की बात करें तो फ़्लू की गतिविधियाँ मध्यम और सीमित रही थीं। नवंबर से पहले गतिविधियों में कोई खास वृद्धि नहीं थी, फरवरी के महीने में सबसे अधिक गतिविधियाँ नोट की गई थी।

इसका प्रभाव अप्रैल तक देखा गया था जिस वजह से इसे सीडीसी द्वारा पिछले 10 सालों का सबसे लंबा सीजन भी कहा गया था।

पिछले वर्ष की सीडीसी फ़्लू रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल इस समय इनफ्लुएंजा ए नाम का वायरस अधिक पाया जा रहा था।

परंतु इस वर्ष इनफ्लुएंजा बी की संख्या अधिक देखने को मिल रही है। संभावना है कि आने वाले कुछ महीनों में कई और परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।

नॉर्डलंड ने कहा कि भले ही इस समय इन्फ्लुएंस बी सर्वाधिक तौर पर मौजूद है परंतु इस वर्ष कौन सा वायरस प्रबल होगा यह कहा नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि साल के इस समय इन्फ्लूएंजा बी का प्रबल होना बेहद ही असामान्य बात है।

पिछले वर्ष 17 नवंबर 2018 को रिलीज की गई सीडीसी रिपोर्ट के अनुसार केवल एक बच्चे की इनफ्लुएंजा से मौत हुई थी और हस्पताल में भी केवल 1.9 प्रतिशत इनफ्लुएंजा के मरीज़ देखे गए थे। यह आंकड़े इस वर्ष पाए जाने वाले आंकड़ों से कुछ कम थे।

टीका लगवाना है आवश्यक

विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही फ़्लू के लिए तैयार की गई वैक्सीन कई उपभेदों से मेल नहीं खा रही परंतु तब भी इस टीके को लगवाना बेहद आवश्यक है।

सीडीसी ने कहा कि फ़्लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वैक्सीन लगवाना और भी जरूरी हो गया है। भले ही वैक्सीन उपभेदों के साथ मेल नहीं खाती परंतु तब भी वह इस बीमारी के लक्षणों से लड़ने में हमारी सहायता कर सकती है।

स्टैनफ़ोर्ड हैल्थ केयर की डॉ एरिक ए. वीस ने कहा कि 60 प्रतिशत मामलों में इनफ्लुएंजा बी वायरस ही पाया गया है जो की इस वैक्सीन से मेल नहीं खाता।

भले ही टीका पूरी तरह बीमारी को नहीं रोक पाएगा परंतु गंभीर रूप से बीमार लोगों को लक्षणों से लड़ने में मदद आवश्य करेगा।

डॉ अमेष का भी कहना है कि वैक्सीन हमें निमोनिया जैसी गंभीर हालत से बचा सकती है।

इसके अतिरिक्त वीस ने सुरक्षात्मक उपाय बताते हुए कहा कि अधिक बार हाथ धोने और बीमार व्यक्ति से 6 फीट दूर खड़े रहने से हम स्वयं की इस फ़्लू से रक्षा कर सकते हैं।

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