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शिवसेना के चल रहे विवादों के बावजूद शुक्रवार को शपथ लेंगे फडणवीस

मुख्य तथ्य

  • बीजेपी के सूत्रों ने उम्मीद जताई कि शिवसेना भी सरकार के साथ शामिल होगी, क्योंकि भगवा सहयोगियों के बीच दावों ने कोई संकेत नहीं दिया
  • फडनवीस 31 अक्टूबर या 1 नवंबर को सीएम पद की शपथ लेंगे और हमें उम्मीद है कि शिवसेना सरकार भी शामिल होगी: स्रोत

अपनी दूसरी अवधि की शुरुआत करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस वीरवार या शुक्रवार को शपथ लेंगे। देवेंद्र ने विरोधी पार्टी शिवसेना की मिनिस्ट्री बर्थ में 50: 50 के बंटवारे व घूर्णी मुख्यमंत्री की मांग को पूरी तरह नकारा है।

शिवसेना की निरंतर मांग रही है कि महाराष्ट्र के मिस्ट्री बर्थ में उन्हें 50 प्रतिशत अधिकार प्राप्त हों और राज्य में घूर्णी मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाए। परंतु बेजेपी ने इस सभी मांगों पर सहमति नहीं दर्शाई है। फडणवीस ने साफ-साफ शब्दों में कहां है कि वह अपनी कुर्सी किसी को नहीं देंगे।

शिवसेना अधिकारों ने इसका कड़ा विरोध किया है। वह समर्थन के लिए तैयार नहीं है। परंतु भाजपा सरकार को अभी भी उम्मीद है की भावनाओं को दूर रखकर शिवसेना अधिकारी उनसे हाथ मिलाएंगे। सूत्रों ने बताया कि 1 नवंबर को फडणवीस मुख्यमंत्री के पद के लिए शपथ लेंगे और उन्हें उम्मीद है कि शिवसेना उनकी सरकार का साथ देगी।

मंगलवार को फडणवीस ने स्वयं स्पष्ट किया था कि वह ही दोबारा मुख्यमंत्री के पद पर बैठेंगे। उन्होंने 50:50 के बंटवारे वाले समझौते को अस्वीकार करते हुए कहां की 5 साल तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बीजेपी का ही राज होगा।

फडणवीस के इस बयान के बाद शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को शाम 4 बजे बीजेपी के साथ होने वाली मीटिंग को रद्द कर दिया। इस मीटिंग में नई सरकार को ले कर कई फैसले लिए जाने थे।

फडणवीस ने शिवसेना के मुखपत्र सामना की तरफ भी नाराज़गी दर्शाते हुए कहां की वह उनकी बार-बार बीजेपी को निशाना बनाने की हरकत से अप्रसन्न हैं। मुंबई में स्थित अपने आधिकारिक निवास वर्षा में मीडिया से बात करते हुए फडणवीस ने कहा कि अगले 5 साल तक बीजेपी सरकार ही महाराष्ट्र में शासन करेगी और किसी को भी इस बात पर आशंका नहीं होनी चाहिए।

सामना के कार्यकारी संपादक व शिवसेना के एमपी संजय राउत ने कहा कि यहां कोई दुष्यंत नहीं है जिसके पिता जेल में हो। इस बात से उन्होंने यह दर्शाया की शिवसेना पर किसी भी समझौते के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना को महाराष्ट्र विधायक दल की बैठक के लिए प्रेक्षक नियुक्त किया है। इस मीटिंग में देवेंद्र फडणवीस को विधायक दल के नेता के रूप में नियुक्त किया जाएगा। जिसके पश्चात वह गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी को सरकार गठन अनुरोध के लिए मिल सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार शिवसेना को इस बात का ज्ञान है कि बीजेपी उनकी 50:50 के बंटवारे वाली सरकार और घूर्णी मुख्यमंत्री के सुझाव को नहीं अपनाएंगे जिस वजह से बहस होना निश्चित है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री पद में स्थान ना मिलने के बाद शिवसेना उपमुख्यमंत्री के पद को पाने का प्रयास करेगी।

शिवसेना के एक नेता ने बताया कि सेना का मुख्य उद्देश्य आदित्य ठाकरे के लिए उपमुख्यमंत्री का पद पाना है परंतु बीजेपी इसके लिए भी तैयार नहीं है। उन्होंने बताया कि विभागों के वितरण पर बहस होना भी प्रत्याशित है।

उद्धव द्वारा रद्द की गई मीटिंग में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर व बीजेपी के भूपेंद्र यादव शामिल होने वाले थे। वहीं दूसरी ओर शिवसेना की तरफ से सुभाष देसाई और संजय राउत इसका हिस्सा बनते।

फडणवीस ने शिवसेना के बयानों को नकारते हुए कहा कि बीजेपी ने किसी भी प्रकार का कोई आश्वासन नहीं दिया था। उद्धव ठाकरे और अमित शाह द्वारा मुख्यमंत्री के पद के लिए एक प्रस्ताव रखा गया था परंतु उस पर किसी भी प्रकार का आश्वासन नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा कि शिवसेना 5 साल के लिए मुख्यमंत्री पद को पाना चाहती है परंतु चाहने और पाने में बेहद अंतर होता है।

उद्धव ठाकरे के उपमुख्यमंत्री बनने पर देवेंद्र ने कहा कि अभी तक उनके पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है परंतु अगर आता है तो वह अन्य सदस्यों के साथ मिलकर इस पर विचार करेंगे।

सामना की आलोचनाओं पर जवाब देते हुए फडणवीस ने कहा कि सामना के आर्टिकल पढ़कर वह बेहद नाखुश हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और एनसीपी भी इस तरह से सरकार की आलोचना नहीं करते। उन्होंने सामना को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है तो वह कांग्रेस और एनसीपी के खिलाफ भी इसी तरह के आर्टिकल लिखें। उन्होंने यह भी कहा कि संजय राउत क्रमरहित हैं परंतु इस तरह के आर्टिकल जनता में एक गलत संदेश पहुंचते हैं।

राउत ने इस पर कहा की उनकी पार्टी किसी गलत चीज़ की मांग नहीं कर रही है बल्कि जो फैसले पहले लिए गए थे उन्हें ही लागू करने को कह रही है।

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