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Excessive Sweating, Medical Causes | जीवन को कठिन बनाता है अधिक पसीना

Excessive Sweating: Medical Causes

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पसीना शरीर में पानी के संतुलन को बनाने का कार्य करता है। Excessive Sweating Medical Causes इसकी कमी से डिहाइड्रेशन भी हो सकता है|

पसीना आना एक ऐसी प्रक्रिया है जो ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम के नियंत्रण में रहती है। (health tips in hindi ) पसीना आना शरीर के तापमान को नियंत्रण में रखने के लिए एक प्रकार की रक्षात्मक प्रणाली है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित बनाए रखने में भी मदद करता है।

किसी भी वजह से शरीर के बहुत ज्यादा गर्म होने की स्थिति में पसीना आना स्वाभाविक है लेकिन बहुत ज़्यादा पसीना आना जो आवश्यकता से अधिक हो उसे हाइपरहाइड्रॉसिस कहा जाता है और यह वाकई कष्टप्रद है।

यह सभी उम्र के लोगों और महिला-पुरुष दोनों को प्रभावित करता है। भले ही यह एक सामान्य समस्या हो लेकिन लोग अब भी इस स्थिति के बारे में बात करने में हिचकिचाते हैं और इसके लिए उचित रूप से मेडिकल सहायता नहीं लेते हैं।

फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन की आशंका बढ़ जाती है

हाइपरहाइड्रॉसिस शरीर के विभिन्न हिस्सों में होता है जिसमें कांख (बगलों), हथेली, तलवे, माथे और अन्य हिस्से शामिल हैं।

बहुत ज्यादा पसीना आना दैनिक जीवन की विभिन्न गतिविधियां करते हुए ढेर सारी दिक्कतें पैदा करता है।

उदाहरण के लिए पसीने भरे हाथ से पकड़ बनाने में दिक्कत होती है।

गाड़ी चला रहे हों और अधिक पसीना आए तो स्टेयरिंग पकड़ने में दिक्कत होती है।

लंबे समय तक कांख में पसीना आने से बदबू पैदा होती है और कपड़ों पर दाग धब्बे भी आ जाते हैं।

अधिक पसीने से त्वचा नम रहती है जिससे फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है।

इस स्थिति से निजात न मिल पाने की वजह से निराशा, आत्मविश्वास की कमी, अवसाद पैदा हो सकता है।

अधिक पसीना आने के कारण
* ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम डिसॉर्डर

* वह दवाएं लेना जो ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती हैं जैसे कि एंटीडिप्रसेंट्स, एंटीकोलाइनेस्टेरेस, प्रोप्रेनॉलोल, पाइलोकार्पिन आदि।

* डायबिटीज़ मेलिटस

*  हाइपरथायरॉइडिज्म

* मलेरिया और टीबी जैसे संक्रमण

*  पेरिफेरल नर्वस डिसॉर्डर

* ह्रदय रोग

* मेनोपॉज और गर्भावस्था के दौरान फिजियोलॉजिकल हाइपरहाइड्रॉसिस।

ज़रूरी  टेस्ट
हाइपरहाइड्रॉसिस के बारे में पता थर्मोरेगुलेटरी स्वेट टेस्ट से किया जाता है, जिसमें शरीर को गर्मी में रखा जाता है और गर्मी की प्रतिक्रिया में आने वाली पसीने की मात्रा का आकलन किया जाता है, जिससे इस स्थिति की गंभीरता के बारे में जानकारी मिलती है।

यह बदलाव हैं कारगर
*  एंटीपर्सपिरेंट डिऑड्रेंट का प्रयोग करना फायदेमंद है।

*  कांख ढंककर रखना चाहिए।

* ढीले सूती कपड़े पहनना चाहिए।

* जूते नाइलोन की तुलना में लेदर का प्रयोग करना बेहतर है।

* मोज़े, सामग्री की तुलना में कॉटन को प्राथमिकता देना चाहिए।

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मेडिकल ट्रीटमेंट
आयन्टोफेरोसिस: हाथों और पैरों को पानी में रखा जाता है और हल्के वोल्टेज वाली दर्दरहित बिजली को पानी से गुज़ारा जाता है और इस स्थिति में आराम देने में मदद करता है।

बोटलिनम टॉक्सिन: फोकल क्षेत्रों में पसीने को नियंत्रित करने में उपयोगी।

एंटीकोलिनर्जिक ड्रग्स: जो ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम के आवेग के प्रसार को रोकते हैं।

थोरेसिक सिम्पैथेक्टॉमी: यह सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें पसीना आने के लिए उत्तरदायी नसों को काट दिया जाता है। इसका सुझाव बेहद गंभीर स्थिति में ही  दिया जाता है।

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