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Depression Causes Treatment in Hindi-अवसाद से बाहर कैसे निकलें

बुख़ार की तरह डिप्रेशन (Depression Causes Treatment in Hindi) भी एक शारीरिक बीमारी है, इसे स्वीकार करें। डिप्रेशन सिर्फ एक मानसिक बीमारी नहीं है। यह एक शारीरिक बीमारी भी है और इसलिए इसमें चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।

Depression Causes Treatment in Hindi आजकल कि बदलती जीवनशैली के कारण मानसिक रोगियों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है।

बहुतों को यह पता नहीं चलता कि उन्हें कोई रोग भी है।

क्या अचानक आपको ऐसा महसूस होने लगा है जैसे आपकी दुनिया ख़त्म हो गई है! या सिर्फ आप तक ही सिमट गई है। तो आप अकेले नहीं हैं

डिप्रेशन एक बहुत गंभीर और आम बीमारी है जिससे दुनिया की लगभग 10 फीसदी आबादी प्रभावित है।

और ये संख्या दिन प्रतिदिन बढती जा रही है।

यदि इसे बिना इलाज के छोड़ दिया जाए तो यह जीवन के हर पहलू पर भारी दुष्प्रभाव डाल सकती है।

अपने डिप्रेशन से लड़ें यहां दिए गए सुझावों का प्रयोग करें।

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क्यों होता है यह रोग

न्यूरोट्रांसमीटर मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच संदेश प्रसारित करने वाले रासायनिक संदेशवाहक होते हैं।

ऐसा माना जाता है कि न्यूरोट्रांसमीटर के असामान्य स्तर की डिप्रेशन में भूमिका होती है।

हार्मोन्स के संतुलन में परिवर्तन भी डिप्रेशन का कारण हो सकता है।

थायरॉइड, मेनोपॉज या हाल ही की गर्भावस्था इन परिवर्तनों में शामिल हो सकती है।

डिप्रेशन वंशानुगत भी हो सकता है। कई विशिष्ट जींस डिप्रेशन से संबंध रखते हैं।

इसके अलावा जीवन में लगातार मिलती असफलता, स्नेह का अभाव, काम की अस्त-व्यस्तता, अपने आप को समय देना या ख़ुद को अनदेखा करना आदि कारण हो सकते हैं।

ये हैं मुख्य प्रकार(Depression Causes Treatment in Hindi)

एंडोजीनस

  • यह आंतरिक कारणों से होता है।

न्यूरोटिक

  • आम तौर पर यह बाहरी कारणों से होता है
  • इनके अलावा डिसथीमिया
  • मौसम प्रभावित डिप्रेशन (सीज़नल इफेक्टिव डिसऑर्डर)
  • छुपा हुआ मनोविक्षप्ति (साइकोटिक मास्क्ड)
  • प्रसन्नमुख (स्माइलिंग) डिप्रेशन के प्रकार हैं

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कैसे पहचानें इस विकार के मरीज़
ये धीरे- धीरे सामने आते हैं। इसमें व्यक्ति दोस्तों के साथ बाहर घूमने की बजाए घर पर अकेले बैठकर टीवी देखने लगता है।

ऐसा करते हुए कई बार दिमाग में बुरे-बुरे ख्याल भी आते रहते है।

डिप्रेशन में कई लोग ख़ुश रहने की बजाए कई दिनों तक और कभी-कभी कई हफ्तों तक नाराज रहते हैं।

डिप्रेशन की अवस्था में इंसान लगातार चिंता से ग्रस्त रहता है।

ये सब डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण हैं जिसे सोशल आईसोलेशन कहते हैं।

डिप्रेशन Depression Causes Treatment in Hindi की वजह से कई बार लोगों को जल्दी गुस्सा आता है और लोग चिड़चिड़े होने लगते हैं।

छोटी-छोटी बातों में गुस्सा स्वाभविक सा हो जाता है।

महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही डिप्रेशन के लक्षण अलग-अलग होते है।

महिलाओ में हो सकता है कि वे एक पल के लिए गुस्सा करें और दूसरे ही पल रोने लगें जबकि पुरुषों में हो सकता है कि वे लंबे समय तक क्रोधित रहें।

पारंपरिक रूप से कहा जाता है कि इंसान डिप्रेशन की अवस्था में लोगों से मिलना-जुलना छोड़ देता है और अकेला रहने लगता है।

अवसाद का सबसे सामान्य लक्षण यही है कि व्यक्ति उदास महसूस करने लगता है।

और उसे एक से दो हफ्तों तक अकेलेपन का अहसास होने लगता है।

इस परिस्थिति को कई लोग ‘निराशा’ भी कहते हैं। यह समस्या लम्बी हो सकती है।

इंसान दो या उससे ज़्यादा सालों तक लगातार निराश रह सकता है।

इस अवस्था में लोग अपनी भूतपूर्व असफलताओं पर ध्यान केन्द्रित करने लगते हैं।

और जब उनके जीवन में कुछ भी सही नहीं चल रहा होता है तो वे ख़ुद को ही उसका दोष देने लगते हैं।

ऐसे लोगों के लिए ‘मैं कुछ भी सही नहीं कर सकता’ और ‘सबकुछ मेरी ही गलती है’ जैसे वाक्य सामान्य हो जाते हैं।

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परिजन में आए इस बदलाव को समझिए

यदि परिवार का कोई सदस्य या कोई दोस्त ज्यादा सोचता रहता है और अकेला ही कुछ बड़बड़ाता रहता है।

तो समझ जाइए कि उसे तुरंत किसी मनोवैज्ञानिक इलाज की ज़रूरत है।

क्योकि कई बार डिप्रेशन की हालत में इंसान का मानसिक स्वास्थ्य भी ख़राब हो सकता है।

पेट का दर्द, शरीर का दर्द, सिर दर्द, ऐंठन और पाचन संबंधी बीमारियां भी डिप्रेशन की अवस्था में होने लगती है।

युवा एवं किशोरों में डिप्रेशन Depression Causes Treatment in Hindi के समय अक्सर शारीरिक दर्द होने लगता है।

ऐसी परिस्थिति में वे अक्सर स्कूल जाने से मना करते हैं और दर्द की वजह से असहज महसूस करने लगते हैं।

यह थैरेपी है कारगर

टॉकथैरेपी : वहमनोचिकित्सा जिसे टॉक थैरेपी, काउन्सलिंग या साइकोसोशल थैरेपी भी कहते हैं डिप्रेशन के इलाज़ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

काउन्सलिंग सत्रों के दौरान पीड़ित अपने व्यवहार और विचारों के बीच संबंध और अनुभवों के बारे में जानते हैं।

यह समय पीड़ित व्यक्ति को डिप्रेशन को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।

जीवन की समस्याओं का सामना करने और उन्हें सुलझाने के बेहतर तरीके सीखता है और वास्तविक लक्ष्य निर्धारित करना भी।

यह सब से ज्यादा सशक्त तरीका है मरीज़ के मन को जानने का।

हो सकता है कि वह सत्र में जाने से आनाकानी करे, लेकिन ध्यान रखना होगा कि प्रभावी इलाज के लिए उसकी नियमित उपस्थिति बहुत महत्वपूर्ण है।

कॉग्निटिव बिहेवियरल थैरेपी

रोज़ सकारात्मक कल्पनाएं करने का अभ्यास करें।

इसे कॉग्निटिव बिहेवियरल थैरेपी कहते हैं और यह डिप्रेशन के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली सबसे आम थैरेपी है।

यह अपने नकारात्मक व्यवहारों और विश्वासों को पहचानने और उन्हें सकारात्मक और स्वास्थ्यप्रद विचारों से बदल देने का एक जागरूक प्रयास है। इस संकल्पना के अभ्यास में बेहतर बनने के लिए काउंसलर या थैरेपिस्ट की मदद लें जो जीवन की नकारात्मक स्तिथियों को पहचानने और उनको सकारात्मक तरह से देखने में मदद कर सकतें हैं।

यह करना है सबसे बेहतर

जॉगिंग, टीम में खेले जाने वाले खेल, बागवानी, तैराकी, वज़न नियंत्रित करने का प्रशिक्षण मरीज़ को दिलवा सकते हैं। लोगों के साथ रहने से एकजुटता की भावना आएगी, मन शांत रहेगा और सही दिशा में सोचेगा।

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