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How to keep Warm in Winter in hindi | सता सकती है सर्दी

How to keep Warm in Winter in hindi 

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How to keep Warm in Winter in hindi  ठंड बढ़ने के साथ ही कान से जुड़ी समस्याएं भी सिर उठाने लगती हैं, जो कई बार गंभीर भी हो जाती हैं। यह क्यों होती हैं तथा इनसे कैसे बच सकते हैं. 

कानों पर सर्दी का होता है ये असर

एक्सॉस्टॉसिस कानों के छिद्र के अंदर हड्डी का असामान्य रूप से बढ़ने वाला रोग है।

ठंडी हवाओं पानी में लगातार रहने से कान के छिद्र के आसपास की हड्डी बढ़ जाती है।

हड्‌डी का बढ़ना दरअसल कान का सुरक्षा कवच है, जो ठंड से कान के पर्दे को सुरक्षित करने का प्रयास करता है।

यह ज़रूरी नहीं कि एक्सॉस्टॉसिस नुकसानदायक ही हो लेकिन कान के छिद्रों का संकुचन की वजह से पानी का रिसना मुश्किल हो जाता है और कान के मैल कान के छिद्र में फंस जाते हैं।

इस वजह से दर्द होता है और कान में बार-बार संक्रमण होता है।

इस स्थिति से अंदरूनी कान में आवाज का रुकना और संचार प्रभावित होता है जिससे सुनाई देने की समस्या होती है।

ऑटिटिसएक्सटर्ना / मीडिया

कान में सूजन आना और सर्दियों में ऊपरी श्वसन ट्रैक्ट के संक्रमण और एलर्जी के मामले बढ़ जाते हैं।

इन दोनों स्थितियों की वजह से यूस्टेशियन ट्यूब डिस्फंक्शन हो सकता है।

जिससे मध्य कान पर अधिक दबाव बनता है और कान के पर्दे पर खिंचाव आता है।

इससे कान में द्रव्य जमा होता है जो इस मौसम के दौरान ब्लड सर्कुलेशन की कमी और इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण संक्रमित हो जाता है, जिससे ऑटिटिस मीडिया होता है।

यह बच्चों के साथ ही साथ वयस्कों में हो सकता है।

ऑटिटिस मीडिया में आमतौर पर हल्के से मध्य बहरापन होता है। इसमें कान में सूजन भी जाती है।

कान के मैल का ठोस होना

ठंडे मौसम की वजह से कान के छिद्र में मैल कठोर हो जाता है।

संभावित रूप से असहजता होने और बहरापन होने की दिक्कत पैदा होती है।

यह श्रवण तंत्र प्रभावित करता है, जिसके कारण सुनने की सीमा 30 से 40 प्रतिशत तक ऊंची हो सकती है।

हवाई सफर का असर

ऊंचाई से संबंधित दबाव में बदलाव के कारण म्यूकस मेम्ब्रेन में सूजन सकती है।

यूस्टेशियन ट्यूब को बाधित कर देता है जिससे कान में दर्द, बंद होने की संवेदना, सुनने में दिक्कत और कुछ मामलों में कान से खून आना या कान के पर्दे फट जाना जैसी समस्याएं भी होती हैं।

ये जानना भी जरूरी
*उन बच्चों में कान का संक्रमण होना आम बात होती है

  • जो डेकेयर में रहते हैं
  • जिनके घर में बड़े धूम्रपान करते हैं
  • या जिन्हें 3 माह से कम समय तक ब्रेस्टफीडिंग कराई जाती है।

*वयस्कों में कान का संक्रमण आमतौर पर उन लोगों को होता है

  • जो कान की सफाई करने के लिए कॉटन टिप एप्लीकेटर का प्रयोग करते हैं
  • और जिन्हें अक्सर ही कान का मैल साफ करने की आदत होती है।

ठंडे मौसम में बहुत ज्यादा रहने की वजह से बाहरी कानों पर असर पड़ सकता है जिससे कानों में हल्के मध्यम स्तर तक बहरापन होने और कान बजने, जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

कान में इंफेक्शन इस मौसम में ज्यादा

ठंडी,सूखी हवा में वायरस ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं।

लोग आमतौर पर ऐसे बंद वातावरण में रहना पसंद करते हैं जहां प्राकृतिक हवा कम होती है इससे एक व्यक्ति से दूसरे में वायरस का संक्रमण ज्यादा होता है।

इस मौसम में गले का संक्रमण अधिक होता है और ये एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण कान में इंफेक्शन की आशंका बढ़ जाती है।

सुनने की समस्या से बचाव के तरीके
*कानों को मफलर या टोपी से ढंककर रखना चाहिए। सिर के आसपास शरीर को गर्म रखने से यह मौसम की खराब स्थितियों में कान को सुरक्षित रखेगा
*कान को ठंडे पानी के संपर्क में आने से बचाने के लिए तैराकी या डाइविंग से बचिए।
*सर्दियों में हवाई जहाज की यात्राओं से बचना चाहिए।
*मैल बनने या इंफेक्शन से बचाने के लिए सुनने की समस्या से पीड़ित लोगों को अपने कानों में हवा आने देनी चाहिए।
*अगर सुनाई देने, कान के संक्रमण और कान में मैल होने के कारण कान जाम होने की स्थिति से गुज़र रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
*अगर सुनाई नहीं देने की समस्या हो रही है तो सुनने का परीक्षण कराएं
*मैल साफ करने के लिए रुई के स्वैब या बाहरी वस्तुओं के प्रयोग से बचना चाहिए।

* कान के मैल की ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें

* नम कपड़े से बाहरी कान को साफ करें।

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